Sunil Chhetri की भावुक अपील: टाटा ग्रुप से बोले- जमशेदपुर FC को बचाइए, भारतीय फुटबॉल को लगेगा बड़ा झटका

जमशेदपुर FC के भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता

नई दिल्ली : भारतीय फुटबॉल में उस समय हलचल मच गई जब जमशेदपुर FC के इंडियन सुपर लीग (ISL) से हटने और सीनियर टीम के संचालन को बंद करने की खबर सामने आई। इस फैसले के बाद भारतीय फुटबॉल के दिग्गज सुनील छेत्री ने टाटा ग्रुप से भावुक अपील करते हुए अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। छेत्री ने कहा कि टाटा समूह का भारतीय फुटबॉल से अलग होना खेल के लिए बड़ा झटका होगा।

सुनील छेत्री ने बताया ‘गहरा झटका’

सुनील छेत्री ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि जमशेदपुर FC की पहली टीम को बंद करने का फैसला उनके लिए “गहरा झटका” (Punch to the gut) है। उन्होंने कहा कि भारतीय फुटबॉल पहले से ही कठिन दौर से गुजर रहा है और ऐसे समय में टाटा समूह जैसे मजबूत संस्थान का पीछे हटना खेल के भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

टाटा ग्रुप से की फैसले पर दोबारा सोचने की अपील

छेत्री ने कहा कि भारतीय फुटबॉल में निवेश करना कभी आसान नहीं रहा, लेकिन मुश्किल समय में मजबूत संस्थानों का साथ बने रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने टाटा ग्रुप से अपील करते हुए कहा कि इस फैसले में केवल व्यावसायिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि भारतीय फुटबॉल के भविष्य को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाए।

खिलाड़ियों ने भी उठाई आवाज

केवल सुनील छेत्री ही नहीं, बल्कि जमशेदपुर FC के कई खिलाड़ियों ने भी टाटा समूह से अपना फैसला बदलने की अपील की है।

भारत के लिए 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके प्रणय हलदर ने कहा कि यह खबर उनके लिए बेहद चौंकाने वाली थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि टाटा समूह ऐसा फैसला लेगा। हलदर ने आग्रह किया कि टाटा समूह और टाटा स्टील के शीर्ष अधिकारी इस निर्णय पर दोबारा विचार करें, क्योंकि यह मंच भारतीय फुटबॉल की नई पीढ़ी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

अल्बिनो गोम्स ने भी जताई चिंता

भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके गोलकीपर अल्बिनो गोम्स ने भी इस फैसले पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि जमशेदपुर FC का बंद होना स्वीकार करना मुश्किल है। उन्होंने टाटा समूह से अपील की कि वह भारतीय फुटबॉल और खिलाड़ियों के भविष्य को देखते हुए अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे।

कई खिलाड़ियों का करियर दांव पर

प्रणय हलदर ने कहा कि निखिल बारला, पुया, अल्बिनो गोम्स और मोहम्मद सनान जैसे कई खिलाड़ी इसी सिस्टम से आगे बढ़कर भारतीय सीनियर टीम तक पहुंचे हैं। उनके मुताबिक क्लब के बंद होने से न केवल मौजूदा खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ प्रभावित होंगे, बल्कि अंडर-19 और अंडर-22 खिलाड़ियों के लिए भी आगे बढ़ने का बड़ा मंच खत्म हो सकता है।

ISL पर भी पड़ सकता है असर

छेत्री का मानना है कि इंडियन सुपर लीग किसी तरह अगले सीजन का आयोजन कर सकती है, लेकिन यदि टाटा ग्रुप जैसा संस्थान लीग से बाहर हो जाता है तो भारतीय फुटबॉल को उसकी भरपाई करना बेहद मुश्किल होगा। उन्होंने इसे भारतीय फुटबॉल के लिए दीर्घकालिक नुकसान बताया।

क्यों लिया गया यह फैसला?

रिपोर्ट्स के अनुसार, जमशेदपुर FC ने आगामी ISL सीजन के लिए भागीदारी शुल्क जमा नहीं किया और इसके बाद क्लब ने पहली टीम के संचालन को बंद करने तथा लीग से हटने का फैसला लिया। क्लब की ओर से इसके पीछे वित्तीय और परिचालन संबंधी कारण बताए गए हैं।

भारतीय फुटबॉल के लिए क्यों अहम है जमशेदपुर FC?

जमशेदपुर FC, जिसकी मालिक टाटा स्टील (टाटा ग्रुप) है, वर्ष 2017 से इंडियन सुपर लीग का हिस्सा रही है। क्लब ने भारतीय फुटबॉल में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर दिया और 2021-22 ISL लीग विनर्स शील्ड भी अपने नाम की थी। इसी वजह से खिलाड़ियों और फुटबॉल से जुड़े लोगों का मानना है कि क्लब का हटना केवल एक टीम का बाहर होना नहीं, बल्कि भारतीय फुटबॉल के विकास के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।

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