Ellenabad, Sirsa (डॉ एम पी भार्गव ,विशेष संवाददाता ): हरियाणा के सबसे ज्यादा चर्चित जिला मुख्यालय सिरसा के लिए कांग्रेस ने जिलाध्यक्ष की नियुक्ति के लिए कवायद शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक स्थानीय कांग्रेस नेता राजकुमार शर्मा, नवीन केडिया, कृष्णा फोगाट, जग्गा सिंह बराड़, मेहता वीरभान, राजेश चाडीवाल, रणधीर सिंह में से किसी एक को कांग्रेस सांसद सैलजा की सीधी स्वीकृति के चलते जिम्मेदारी दी जा सकती है। यदि महिला जिलाध्यक्ष संतोष बैनीवाल की तरह यह पद महिला कोटे में आता है, तो कृष्णा फोगाट की लाटरी लग सकती है, जिन्हें राजनीति का लंबा अनुभव है।
फौगाट नगर परिषद सिरसा की वाईस चेयरपर्सन भी रह चुकी है। सुशिक्षित कृष्णा फोगाट (जाट महिला नेता ) है। राजकुमार शर्मा स्व दादा होशियारी लाल शर्मा के बेटे हैं और उन्हें राजनीति विरासत में मिली है। दादा ने खुद विधानसभा चुनाव लडा और अपने लोकसभा तथा विधानसभा के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राजकुमार शर्मा को दादा होशियारी लाल शर्मा की राजनीति का अनुभव मजबूत पकड़ और प्रभाव बनाए हुए हैं।
राजकुमार शर्मा वर्तमान में हरियाणा कांग्रेस के प्रांतीय प्रतिनिधि है। मेहता वीरभान सांसद सैलजा के करीबी हैं और अपने जीवन के साथ दशक पार कर चुके हैं। ऐसे फैक्टर उनकी दावेदारी पर प्रश्न चिन्ह लगा सकता है। जातीय समीकरणों में विधानसभा चुनाव लड चुके नवीन केडिया की दावेदारी भी प्रबल नजर आती है। नवीन अग्रवाल वैश्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं और हरियाणा के किसी भी जिले से कांग्रेस का जिलाध्यक्ष नहीं है, जबकि एक मात्र इस समाज के जिलाध्यक्ष बजरंग गर्ग रंग बदल चुके हैं। सिख समुदाय से जग्गा सिंह बराड़ और रणवीर सिंह दावेदारी की कतार में हैं, इसके समाधान के लिए जग्गा सिंह बराड़ को डबवाली पुलिस जिला का जिलाध्यक्ष बनाया जा सकता है।
रणधीर सिंह का पुराना कांग्रेस परिवार है और उन्होंने ने नगर परिषद का चेयरमैन रहते हुए स्वच्छ छवि के चलते एक पहचान बनाई है। राजेश चाडीवाल सांसद सैलजा का विश्वास पात्र हैं। जिलाध्यक्ष पद के लिए बढ़ता आंकड़ा कांग्रेस की गुटबाजी का संकेत देता है। लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव 2029 में होने है और इस लंबी के बीच सरकार के खिलाफ संघर्ष करने, जनाधार में इजाफा करने के लिए भारी भरकम खर्च करना और सभी दावेदारों को साथ लेकर चलने में कौन सा चेहरा रहेगा, इसपर शीर्ष नेतृत्व को मंथन करना होगा, ऐसा राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं।
इससे पूर्व सांसद सैलजा के सहयोग से संतोष बैनीवाल को जिलाध्यक्ष बनाया गया था,जो कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की उम्मीद पर खरा नहीं उतर पाई। क्या सैलजा की इस नियुक्ति को लेकर सहमति में बदलाव हो पायेगा,यह तो आने वाले समय के गर्भ में छिपा है , देखना है जिला सिरसा का राजनीतिक भविष्य क्या रहता है।
