श्री कृष्ण कथा, गीता ज्ञान-यज्ञ — आर्य समाज मंदिर गोविन्दपुरी मोदीनगर

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व श्रावणी पर्व के उपलक्ष्य में आर्य समाज गोविन्दपुरी मोदीनगर में 11 अगस्त से 17 अगस्त तक प्रतिदिन रात्रि 7 से 9:30 बजे तक श्रीकृष्ण कथा व गीता ज्ञान यज्ञ का आयोजन हो रहा है। इसमें श्री वैदिक योगाश्रम आनंदथाम आश्रम हरिद्वार के अध्यक्ष, गीता मनीषी आचार्य अखिलेश्वर भारद्वाज जी कथा व्यास तथा संगीताचार्य श्री देव आर्य जी के द्वारा ज्ञान की वर्षा की जा रही है।

दूसरे दिन कथा व्यास आचार्य अखिलेश्वर भारद्वाज जी ने कहा कि गांधारी का आंखों पर पट्टी बांधना प्रतीकात्मक है। गांधारी शास्त्रों की ज्ञाता, शिव की तपस्विनी और न्यायप्रिय महिला थीं। वे अपने पुत्रों की दुष्ट प्रवृत्तियों से अत्यंत दुखी रहतीं और उन्हें रोकने का प्रयास करतीं, किंतु महाराज धृतराष्ट्र उनकी बात नहीं सुनते थे। परिणामस्वरूप उन्होंने दुखी मन से गलत को अनदेखा करना शुरू कर दिया, जिसे आंखों पर पट्टी बांधने के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया।

इसी प्रकार रावण दशों दिशाओं का ज्ञानी था, इसलिए उसे ‘दशानन’ कहा गया। लेकिन चित्रकारों ने इस ज्ञान को प्रतीकात्मक रूप में दस मुख के चित्र से दर्शाया। वास्तव में उसके दस सिर नहीं थे, जैसे किसी वीर को ‘शेर’ कहना यह नहीं दर्शाता कि उसके पंजे और जबड़े शेर के जैसे हैं। यह भाषा की लक्षणा शक्ति है, जिसे पाखंड समझने के बजाय विवेक से ग्रहण करना चाहिए।

कथा व्यास जी ने कहा कि जैसे छोटे से बीज में विशाल वटवृक्ष छिपा होता है, वैसे ही उच्च पद पर बैठे व्यक्ति के मन में ईर्ष्या, महत्वाकांक्षा, भ्रष्टाचार और तुच्छ सोच हो तो यही नाश का कारण बनते हैं। धृतराष्ट्र के ऐसे मनोविकार ही महाभारत जैसे विनाशकारी युद्ध का कारण बने। यदि उन्होंने पांडवों के साथ न्याय किया होता, तो करोड़ों लोगों की मौत का तांडव नहीं होता।

अतः श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश है कि मनोविकारों से दूर रहें, इंद्रियों पर विजय प्राप्त करें और अनुशासित जीवन जीएं। गीता की वाणी केवल अर्जुन के लिए नहीं, बल्कि हर मनुष्य और प्रत्येक राष्ट्राध्यक्ष के लिए है। यदि सब इसे अपनाएं तो ही विश्व कल्याण संभव है।

इस आयोजन का प्रबंधन आर्य समाज और महिला आर्य समाज के तत्वावधान में श्री देशबंधु जी व समस्त कार्यकारिणी द्वारा सराहनीय रूप से किया जा रहा है।

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