Semicon 2.0 Investment: भारत को सेमीकंडक्टर हब बनाने की तैयारी, 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता

Semicon 2.0 Investment: भारत में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को मजबूत करने की दिशा में सरकार की Semicon 2.0 पहल के तहत करीब 1 लाख करोड़ रुपये यानी 11-12 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धताएं सामने आई हैं। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने SEMICON India 2026 के दौरान यह जानकारी दी। उनके मुताबिक इन निवेश प्रतिबद्धताओं का दायरा केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि सेमीकंडक्टर से जुड़े पूरे इकोसिस्टम में निवेश की संभावना है। इनमें उपकरण, मटेरियल, गैस, केमिकल, असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग, सब्सट्रेट और वेफर्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

सरकार के अनुसार ये निवेश अगले दो से तीन वर्षों में आने की उम्मीद है। हालांकि, अभी सभी कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कुछ कंपनियां अपने बोर्ड और शेयरधोल्डर्स से जरूरी मंजूरी मिलने के बाद ही निवेश की औपचारिक घोषणा करना चाहती हैं। इसलिए फिलहाल सामने आया 1 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा निवेश प्रतिबद्धताओं से जुड़ा है, न कि पूरी राशि के तत्काल निवेश से।

Semicon 2.0 का मकसद क्या है?

Semicon 2.0 को भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र के अगले चरण के रूप में देखा जा रहा है। सरकार के मुताबिक Semicon 1.0 का मुख्य उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर उद्योग की बुनियादी नींव तैयार करना था। इसके बाद Semicon 2.0 के जरिए डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग, उपकरण, मटेरियल, एडवांस्ड पैकेजिंग, रिसर्च और डेवलपमेंट तथा स्किल्ड मैनपावर तक एक व्यापक इकोसिस्टम विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

सरकार ने Semicon 2.0 के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये के कुल बजट आउटले को मंजूरी दी है। इस कार्यक्रम के तहत सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ उन उद्योगों को भी बढ़ावा देने की योजना है जो चिप निर्माण के लिए जरूरी मशीनरी, केमिकल, गैस और अन्य सामग्री उपलब्ध कराते हैं।

इसका उद्देश्य सिर्फ कुछ बड़ी फैक्ट्रियां स्थापित करना नहीं, बल्कि ऐसा पूरा नेटवर्क तैयार करना है जिसमें चिप की डिजाइनिंग, निर्माण, पैकेजिंग, टेस्टिंग, रिसर्च और सप्लाई चेन से जुड़े अलग-अलग हिस्से देश में विकसित हो सकें।

1 लाख करोड़ रुपये के निवेश से किन क्षेत्रों को फायदा?

अश्विनी वैष्णव के मुताबिक Semicon 2.0 के तहत सामने आई निवेश प्रतिबद्धताएं सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के अलग-अलग हिस्सों में फैली हुई हैं। इनमें सेमीकंडक्टर बनाने वाली मशीनें और उपकरण, जरूरी मटेरियल, गैस और केमिकल के अलावा असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग जैसी गतिविधियां शामिल हैं। सब्सट्रेट और वेफर्स भी इस इकोसिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में किसी चिप को तैयार करने की प्रक्रिया केवल फैब लगाने तक सीमित नहीं रहती। चिप डिजाइन से लेकर वेफर निर्माण और फिर पैकेजिंग तथा टेस्टिंग तक कई चरण होते हैं। इसके अलावा इन सभी चरणों के लिए विशेष उपकरण, अत्यधिक शुद्ध सामग्री, गैस और केमिकल की जरूरत होती है।

इसी वजह से सरकार Semicon 2.0 के तहत पूरे इकोसिस्टम को विकसित करने पर जोर दे रही है। इससे घरेलू सप्लाई चेन तैयार करने और बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी काम हो सकता है।

करीब 1 लाख नई नौकरियों की उम्मीद

Semicon 2.0 के तहत निवेश के साथ रोजगार को भी एक महत्वपूर्ण लक्ष्य के तौर पर देखा जा रहा है। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में करीब 1 लाख नई रोजगार संभावनाएं बन सकती हैं। उन्होंने इसे एक कंजर्वेटिव अनुमान बताया और कहा कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है।

सेमीकंडक्टर उद्योग में रोजगार सिर्फ चिप फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं होते। डिजाइन इंजीनियरिंग, मशीनरी, मटेरियल, रिसर्च, पैकेजिंग, टेस्टिंग, सप्लाई चेन और तकनीकी सेवाओं में भी विशेषज्ञों की जरूरत होती है।

यही वजह है कि सरकार Semicon 2.0 में टैलेंट डेवलपमेंट को भी एक अलग प्रमुख क्षेत्र के रूप में देख रही है। सरकारी जानकारी के अनुसार करीब 400 विश्वविद्यालय और संस्थान पहले से चिप डिजाइन की शिक्षा से जुड़े हुए हैं। अब सिस्टम डिजाइन और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग से संबंधित कौशल को भी बढ़ाने की योजना है।

1 लाख तकनीशियनों को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य

सरकार ने आने वाले पांच वर्षों में करीब 1 लाख तकनीशियनों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी पर जोर दिया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग की भी योजना है, जिसमें Taiwan के ITRI जैसे संस्थान शामिल हैं।

सेमीकंडक्टर निर्माण में अत्यधिक तकनीकी और विशेष कौशल की जरूरत होती है। इसलिए केवल निवेश आकर्षित करना पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। फैब, पैकेजिंग यूनिट और अन्य तकनीकी सुविधाओं के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता भी जरूरी होगी।

इसी कारण Semicon 2.0 में टैलेंट डेवलपमेंट को व्यापक रणनीति का हिस्सा बनाया गया है।

200 से ज्यादा चिप डिजाइन स्टार्टअप पर फोकस

Semicon 2.0 के तहत भारत के चिप डिजाइन इकोसिस्टम को भी विस्तार देने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार 200 सेमीकंडक्टर डिजाइन स्टार्टअप और कंपनियों को आगे बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। पहली चरण की योजना के तहत समर्थित 105 सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स में से 20 ने वेंचर कैपिटल फंडिंग हासिल की है।

इसका मतलब यह है कि सरकार सेमीकंडक्टर क्षेत्र को सिर्फ बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के नजरिए से नहीं देख रही है। स्टार्टअप, डिजाइन कंपनियां और सिस्टम डिजाइन से जुड़े कारोबार भी इस रणनीति का हिस्सा हैं।

चिप डिजाइन के क्षेत्र में भारत पहले से ही बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी प्रतिभा रखता है। Semicon 2.0 का लक्ष्य इस क्षमता को व्यावसायिक और औद्योगिक स्तर पर और मजबूत करना है।

मशीन और मटेरियल सेक्टर पर भी जोर

सेमीकंडक्टर फैक्ट्री स्थापित करने के लिए सिर्फ जमीन और प्लांट की जरूरत नहीं होती। इसके लिए अत्याधुनिक मशीनरी, विशेष केमिकल, गैस, वेफर और कई अन्य सामग्री की जरूरत होती है। ऐसे में अगर इन क्षेत्रों से जुड़ी कंपनियां भी भारत में उत्पादन और रिसर्च शुरू करती हैं, तो सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम ज्यादा व्यापक हो सकता है।

सरकार ने Semicon 2.0 में मशीन और मटेरियल सेक्टर को अलग प्रमुख स्तंभ के रूप में रखा है। इसका उद्देश्य भारत में precision manufacturing की क्षमता को बढ़ाना भी है।

एडवांस्ड पैकेजिंग और रिसर्च पर भी फोकस

Semicon 2.0 में advanced packaging को भी महत्वपूर्ण क्षेत्र बनाया गया है। आधुनिक सेमीकंडक्टर सिस्टम में पैकेजिंग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। सरकार भारत में इस क्षेत्र की क्षमता विकसित करने पर भी जोर दे रही है।

इसके अलावा रिसर्च और डेवलपमेंट को भी कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। सरकारी योजना के अनुसार उद्योग, सरकार और अकादमिक संस्थानों के बीच सहयोग के जरिए applied R&D को बढ़ावा देने की कोशिश की जाएगी। इसका उद्देश्य ऐसी तकनीक विकसित करना है जिसे आगे औद्योगिक उपयोग में लाया जा सके।

वैश्विक कंपनियों की भारत में बढ़ती दिलचस्पी

SEMICON India 2026 के दौरान भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र को लेकर वैश्विक कंपनियों की दिलचस्पी भी दिखाई दी। Reuters के मुताबिक अमेरिकी सेमीकंडक्टर उपकरण कंपनी Applied Materials ने भारत में अगले दशक के दौरान 5 अरब डॉलर के निवेश की योजना की घोषणा की है। यह निवेश रिसर्च, सप्लाई चेन और वर्कफोर्स विस्तार जैसे क्षेत्रों में किया जाना है।

SEMICON India 2026 में 52 देशों की 600 से ज्यादा कंपनियों की भागीदारी बताई गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी और निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है सेमीकंडक्टर सेक्टर?

सेमीकंडक्टर आज मोबाइल फोन, कार, कंप्यूटर, टेलीकॉम उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक मशीनरी और कई आधुनिक तकनीकों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक्स के बढ़ते इस्तेमाल के साथ चिप्स की मांग भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

भारत के लिए घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने का एक उद्देश्य सप्लाई चेन को मजबूत करना है। सरकार के अनुसार वैश्विक सप्लाई चेन में विविधता और मजबूती की जरूरत बढ़ रही है और भारत इस क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

कुल मिलाकर, Semicon 2.0 के तहत करीब 1 लाख करोड़ रुपये की निवेश प्रतिबद्धताएं भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विस्तार से जुड़ी हैं। अगले दो से तीन वर्षों में इन प्रतिबद्धताओं के अमल में आने की उम्मीद है, हालांकि कंपनियों के स्तर पर निवेश की औपचारिक घोषणाएं आवश्यक मंजूरियों के बाद होंगी। सरकार का फोकस चिप निर्माण के साथ डिजाइन, मशीनरी, मटेरियल, पैकेजिंग, रिसर्च और स्किल्ड मैनपावर को एक साथ विकसित करने पर है।

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