PM आवास के पास बने इस स्कूल को 1 रुपये सालाना लीज पर मिली जमीन, एक बच्चे की फीस 50 लाख रुपये तक

अमेरिकी दूतावास के बगल में स्थित स्कूल की फीस और जमीन को लेकर फिर चर्चा

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में स्थित American Embassy School एक बार फिर चर्चा में है। प्रधानमंत्री आवास 7 लोक कल्याण मार्ग से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस स्कूल को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसे नाममात्र की दर पर जमीन उपलब्ध कराई गई थी, जबकि यहां पढ़ने वाले एक छात्र पर सालाना खर्च करीब 50 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।

13 एकड़ में फैला है स्कूल परिसर

जानकारी के अनुसार, अमेरिकन एम्बेसी स्कूल लगभग 13 एकड़ के विशाल परिसर में फैला हुआ है। यह परिसर प्रधानमंत्री आवास के क्षेत्रफल से भी बड़ा बताया जाता है। स्कूल अमेरिकी दूतावास के समीप स्थित है और मुख्य रूप से राजनयिकों, विदेशी नागरिकों तथा अंतरराष्ट्रीय परिवारों के बच्चों को शिक्षा प्रदान करता है।

1 रुपये सालाना लीज पर मिलने का दावा

उपलब्ध कानूनी दस्तावेजों और सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार, स्कूल की जमीन को 1973 में शैक्षणिक उपयोग के लिए अमेरिकी सरकार को हस्तांतरित किया गया था। बताया जाता है कि राजनयिक समझौतों के तहत ऐसी जमीनें प्रतीकात्मक रूप से 1 रुपये या 1 डॉलर वार्षिक लीज पर दी जाती रही हैं।

हजारों करोड़ की बताई जाती है जमीन की कीमत

चाणक्यपुरी दिल्ली के सबसे प्रीमियम इलाकों में गिना जाता है। शिक्षा विशेषज्ञों और सोशल मीडिया पर वायरल चर्चाओं में दावा किया गया है कि इस क्षेत्र में स्थित 13 एकड़ जमीन की वर्तमान बाजार कीमत हजारों करोड़ रुपये हो सकती है। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक मूल्यांकन रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

एक बच्चे पर सालाना खर्च 50 लाख रुपये तक

स्कूल की आधिकारिक फीस संरचना के अनुसार, हाई स्कूल कक्षाओं (ग्रेड 9-12) के लिए वार्षिक ट्यूशन फीस 31,705 अमेरिकी डॉलर तक है। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन फीस, एप्लीकेशन फीस, बस सेवा, लंच और अतिरिक्त भाषा कार्यक्रमों की फीस भी अलग से ली जाती है।

यदि सभी शुल्कों को जोड़ दिया जाए तो एक छात्र पर सालाना खर्च 51,505 अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 49 से 50 लाख रुपये के बराबर बैठता है।

विदेशी परिवारों को मिलती है प्राथमिकता

स्कूल में प्रवेश प्रक्रिया काफी चयनात्मक मानी जाती है। आवेदन, मूल्यांकन और इंटरव्यू के बाद एडमिशन दिया जाता है। यहां विदेशी दूतावासों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विदेश से आए परिवारों के बच्चों को प्राथमिकता मिलती है, हालांकि भारतीय छात्रों को भी प्रवेश दिया जाता है।

फीस से चलता है स्कूल का संचालन

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्कूल की आय का अधिकांश हिस्सा छात्रों से वसूली जाने वाली ट्यूशन फीस से आता है। स्कूल का संचालन मुख्य रूप से स्वयं के राजस्व मॉडल पर आधारित है और इसकी आय का बड़ा हिस्सा फीस से प्राप्त होता है।

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