सावन का सोमवार: प्रयागराज के मनकामेश्वर मंदिर में शिवभक्तों का तांता, त्रेतायुग और प्रभु श्रीराम से जुड़ा है इस सिद्धपीठ का इतिहास
सावन के पहले सोमवार पर शिवभक्तों में भारी उत्साह
- रिपोर्ट- प्रमोद यादव
प्रयागराज। सनातन धर्म में श्रावण मास का विशेष महत्व माना गया है। सावन के पहले सोमवार के पावन अवसर पर तीर्थराज प्रयाग पूरी तरह से शिवभक्ति के रंग में रंगी नजर आ रही है। यमुना तट पर स्थित शहर के सबसे प्रमुख ‘प्राचीन सिद्धपीठ श्री मनकामेश्वर महादेव मंदिर’ में सुबह से ही भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा है। पूरा मंदिर परिसर और आसपास का इलाका ‘हर-हर महादेव’ और ‘ओम नमः शिवाय’ के जयकारों से गूंज रहा है।
दर्शन के लिए लगीं लंबी कतारें, हाथों में जल और बेलपत्र
सामने आई तस्वीरों और वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मंदिर के बाहर श्री शंकराचार्य निवास से लेकर मुख्य द्वार तक शिवभक्तों की कई सौ मीटर लंबी कतारें लगी हुई हैं। कतार में लगे महिलाओं, पुरुषों, बुजुर्गों और युवाओं के हाथों में गंगाजल, दूध, फूल, धतूरा और बेलपत्र है। अपनी बारी का इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं में भोलेनाथ के दर्शन और उन्हें जल अर्पित करने के लिए गजब की श्रद्धा और उत्साह देखा जा रहा है।
सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम, पुलिस मुस्तैद
श्रद्धालुओं की इस भारी भीड़ को सुरक्षित और सुगम दर्शन कराने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। मंदिर परिसर के अंदर और बाहर मुख्य मार्गों पर पुलिसकर्मियों की भारी तैनाती की गई है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए खास तौर पर जिग-जैग बैरिकेडिंग लगाई गई है। पुलिस प्रशासन लगातार लाउडस्पीकर के जरिए श्रद्धालुओं से शांतिपूर्ण तरीके से कतार में चलते रहने की अपील कर रहा है, ताकि किसी भी तरह की भगदड़ या अव्यवस्था न फैले।
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प्रभु श्रीराम और त्रेतायुग से जुड़ा है पौराणिक इतिहास
श्री मनकामेश्वर मंदिर केवल एक देवालय नहीं, बल्कि आस्था और गौरवशाली इतिहास का एक अद्भुत संगम है। स्कंद और पद्म पुराण में वर्णित कथाओं के अनुसार, इस मंदिर का सीधा संबंध त्रेतायुग और भगवान श्रीराम से है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वनवास जाते समय प्रभु श्रीराम, माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ प्रयाग में रुके थे। आगे की कठिन वनवास यात्रा पर जाने से पूर्व, माता सीता की मनोकामना पूर्ण करने और अपनी यात्रा को निर्विघ्न बनाने के लिए प्रभु श्रीराम ने स्वयं यमुना तट पर इसी स्थान पर शिवजी की स्थापना कर उनका पूजन और जलाभिषेक किया था।
हर मनोकामना पूरी करते हैं मनकामेश्वर महादेव
तभी से यह स्थान एक ‘सिद्धपीठ’ के रूप में विख्यात हो गया। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से दर्शन-पूजन और जलाभिषेक करने से श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूरी होती है, इसीलिए इन्हें ‘मनकामेश्वर महादेव’ कहा जाता है। सावन के पवित्र महीने में यहां दर्शन और पूजन का महत्व और भी कई गुना बढ़ जाता है, यही वजह है कि आज देश के कोने-कोने से भक्त यहां चले आते हैं।
