सावन को श्रावण क्यों कहा जाता है? जानिए नाम, महत्व और भगवान शिव से इसका गहरा संबंध

Sawan 2026: हिंदू पंचांग में सावन (श्रावण) का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र महीनों में माना जाता है। इस पूरे महीने में शिव भक्त व्रत रखते हैं, जलाभिषेक करते हैं और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप कर भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सावन को ‘श्रावण’ क्यों कहा जाता है?

श्रावण नाम कैसे पड़ा?

ज्योतिष और हिंदू पंचांग के अनुसार इस महीने की पूर्णिमा के समय श्रवण नक्षत्र का विशेष प्रभाव रहता है। इसी कारण इस माह का नाम ‘श्रावण’ रखा गया। समय के साथ बोलचाल की भाषा में ‘श्रावण’ का उच्चारण बदलकर ‘सावन’ हो गया।

भगवान शिव का प्रिय महीना क्यों है सावन?

पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले विष (हलाहल) को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। विष की तीव्रता को शांत करने के लिए देवताओं ने शिव का जलाभिषेक किया। इसी घटना के कारण सावन का महीना भगवान शिव की विशेष पूजा और जलाभिषेक से जुड़ा माना जाता है।

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सावन में क्यों किया जाता है जलाभिषेक?

मान्यता है कि सावन में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। विशेष रूप से सावन के सोमवार (सावन सोमवारी) का अत्यधिक धार्मिक महत्व है। इस दिन व्रत रखने और शिव पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।

सावन का आध्यात्मिक संदेश

सावन केवल धार्मिक अनुष्ठानों का महीना नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, संयम, भक्ति और प्रकृति के प्रति सम्मान का भी प्रतीक माना जाता है। वर्षा ऋतु के बीच आने वाला यह महीना जीवन में सकारात्मकता, धैर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का संदेश देता है।

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