संभल में 50 करोड़ की जमीन पर बड़ा फैसला, SDM कोर्ट ने आर्य समाज मंदिर और ग्राम समाज के नाम दर्ज की भूमि
संभल : उत्तर प्रदेश के संभल में जमीन विवाद से जुड़े एक अहम मामले में SDM कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। संभल के शेर खां सराय इलाके में स्थित करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य की पांच बीघा जमीन को एक साल तक चली सुनवाई के बाद दोबारा आर्य समाज मंदिर और ग्राम समाज के नाम दर्ज करने का आदेश दिया गया है। फैसले के बाद राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज 11 नाम निरस्त कर दिए गए हैं।
गाटा संख्या 103, 106 और 107 को लेकर था विवाद
यह मामला शेर खां सराय इलाके में स्थित गाटा संख्या 103, 106 और 107 की कुल 3,350 वर्ग मीटर जमीन से जुड़ा है। आर्य समाज मंदिर के प्रतिनिधियों ने करीब एक साल पहले संभल जिला प्रशासन से शिकायत की थी और जमीन पर अपना दावा किया था।
शिकायतकर्ताओं का कहना था कि वर्ष 1960 की चकबंदी प्रक्रिया के दौरान यह जमीन आधिकारिक रूप से आर्य समाज मंदिर के नाम दर्ज थी। आरोप था कि बाद में कथित फर्जीवाड़े और मिलीभगत के जरिए जमीन पर निजी लोगों के नाम दर्ज करा दिए गए।
SDM विकास चंद्र की अदालत में चली सुनवाई
शिकायत के बाद मामला संभल के SDM विकास चंद्र के न्यायालय में पहुंचा। करीब एक साल तक चली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने दस्तावेज और सबूत पेश किए। मामले की जांच के लिए तहसीलदार से मौके की रिपोर्ट भी मांगी गई।
तहसीलदार की जांच रिपोर्ट में बताया गया कि संबंधित 3,350 वर्ग मीटर जमीन आर्य समाज मंदिर की है और मौके पर पक्के निर्माण तथा एक मजार मौजूद है। रिपोर्ट के आधार पर SDM कोर्ट ने जमीन को दोबारा आर्य समाज मंदिर और प्रधान ग्राम समाज के नाम दर्ज करने का फैसला सुनाया।
11 नाम तत्काल प्रभाव से निरस्त
SDM कोर्ट के फैसले के बाद राजस्व रिकॉर्ड से अकीला बेगम, अहमद हसन, गुलाम वारिस, मोहम्मद अली, मोहम्मद आलम, मोहम्मद हसन, माहिर हुसैन, तकिरुल्लाह, नुरुल्ला, शब्बीरन और सुल्तान के नाम तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं।
मौके पर मिले 10 पक्के मकान और एक मजार
अदालत का आदेश मिलने के बाद तहसील प्रशासन की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और जमीन की पैमाइश कराई। प्रशासन के अनुसार, जांच के दौरान संबंधित जमीन पर 10 पक्के मकान और एक मजार मिली।
प्रशासन ने वहां मौजूद कब्जाधारियों को जमीन खाली करने की चेतावनी दी है। कहा गया है कि यदि लोग स्वयं जमीन खाली नहीं करते हैं तो आगे कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने क्या कहा?
मामले में तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि गाटा संख्या 103, 106 और 107 राजस्व रिकॉर्ड में आर्य समाज मंदिर के नाम दर्ज जमीन थी और इसका प्रबंधन ग्राम समाज के प्रधान को सौंपा गया था।
उनके अनुसार, पहले ग्राम समाज के प्रधान और कुछ स्थानीय लोगों द्वारा जमीन पर कथित रूप से अवैध कब्जा कर प्लॉटिंग की गई और जमीन को बेचा गया। प्रशासन के मुताबिक, जमीन पर एक मजार और 10 से अधिक मकान बनाए गए थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर SDM कोर्ट ने जमीन को दोबारा आर्य समाज मंदिर के नाम दर्ज करने का आदेश दिया है।
मुस्लिम पक्ष ने उठाए सवाल
वहीं, स्थानीय मौलाना मुशर्रफ हुसैन ने प्रशासन के दावों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि संबंधित मजार करीब 100 से 150 साल पुरानी है और स्थानीय लोगों के अनुसार इसका पुराना धार्मिक इतिहास रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके बुजुर्गों के अनुसार यह खरीदी हुई जमीन थी, जिस पर दरगाह बनाई गई थी।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
मौके पर स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासन सतर्क है। प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, नापजोख की रिपोर्ट के बाद तहसीलदार कोर्ट में धारा 67 के तहत बेदखली की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद अवैध निर्माणों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई की संभावना जताई गई है।
