रामपुर का जिला चिकित्सालय खुद वेंटिलेटर पर, मोबाइल टॉर्च की रोशनी में मरीज को लगाए टांके
वायरल वीडियो ने खोली स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल, सीएमएस बीसी सक्सेना ने वायरल वीडियो की जाचं के बाद जारी किया बयान
- रिपोर्ट: शाहबाज़ खान
रामपुर का जिला अस्पताल इन दिनों खुद अपनी बदहाली की कहानी बयां कर रहा है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो में अस्पताल के कर्मचारी मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में मरीज को टांके लगाते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं,
तस्वीरें रामपुर के जिला अस्पताल की हैं, जहां मरीजों के इलाज के लिए आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन वायरल वीडियो में जो तस्वीर सामने आई है, वह इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है,सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि अस्पताल में एक मरीज के टांके लगाए जा रहे हैं और इस दौरान पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नजर नहीं आ रही,ऐसे में मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर रोशनी की जा रही है और उसी रोशनी में अस्पताल कर्मचारी मरीज का उपचार करते दिखाई दे रहे हैं,सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस जिला अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी है, वहां इलाज के दौरान रोशनी तक की उचित व्यवस्था क्यों नहीं थी, क्या अस्पताल में बिजली की समस्या थी? क्या इमरजेंसी वार्ड में बैकअप व्यवस्था मौजूद नहीं थी? या फिर अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के चलते मरीज को मोबाइल की रोशनी में उपचार कराना पड़ा।
वायरल वीडियो ने जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर उठने लगे हैं।
लोगों का कहना है कि अगर जिला अस्पताल में रात के समय इस तरह मोबाइल की टॉर्च से मरीज का इलाज करना पड़ रहा है, तो अस्पताल की व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत समझी जा सकती है,रामपुर जिला अस्पताल में इलाज कराने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं,ऐसे में जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर सामने आया यह वीडियो मरीजों और उनके तीमारदारों के बीच भी चिंता पैदा कर रहा है।
अब देखने वाली बात होगी कि वायरल वीडियो पर स्वास्थ्य विभाग क्या कार्रवाई करता है और जिला अस्पताल में इस तरह की स्थिति दोबारा सामने न आए, इसके लिए क्या कदम उठाए जाते हैं,
