पंजाबी जूती कॉपी विवाद: इटली की ‘प्राडा’ कंपनी के खिलाफ पंजाबी कारीगरों में आक्रोश

पंजाब की संस्कृति और परंपरा की पहचान फुलकारी और पंजाबी जूती है। पंजाब में शादियों और अन्य कार्यक्रमों में लड़कियाँ अक्सर फुलकारी दुपट्टा, पंजाबी सूट और पंजाबी जूती पहनना पसंद करती हैं। मगर अब यही पंजाबी जूती विवादों में घिरी हुई नजर आ रही है।

इटली की मशहूर फैशन ब्रांड प्राडा ने पंजाबी जूती की नकल कर के अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतारा है, जिसकी कीमत 50 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक रखी गई है। गौरतलब है कि इससे पहले भी प्राडा कंपनी ने कोल्हापुरी जूती की नकल की थी, जिससे बड़ा विवाद खड़ा हो गया था और बाद में कंपनी को माफी भी मांगनी पड़ी थी।

अब एक बार फिर प्राडा कंपनी पंजाबी जूती को लेकर विवादों में फंस गई है। इस पूरे मामले को लेकर पंजाब के कारीगरों और दुकानदारों में गहरा रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि हमारी पंजाबी जूती की कीमत 400 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक होती है, और यह पूरी तरह हाथ से बनाई जाती है।

कारीगरों का कहना है कि एक जूती को तैयार करने में दो से तीन दिन की मेहनत लगती है, जबकि प्राडा कंपनी ने इसकी मशीनों से नकल कर के एक दिन में 30-40 जूतियाँ बना दीं। पंजाबी कारीगरों द्वारा बनाई गई जूतियाँ पूरी तरह हाथ की कढ़ाई से तैयार होती हैं, जो पंजाबी महिलाओं के लिए गर्व और शान की वस्तु हैं।

कारीगरों ने कहा कि हम इसका सख्त विरोध करते हैं कि हमारी कारीगरी की नकल कर के महंगे दामों पर विदेशी बाजारों में बेचा जा रहा है।

अमृतसर से मिली जानकारी के अनुसार, पंजाब की सांस्कृतिक पहचान फुलकारी और पंजाबी जूती एक बार फिर विवादों में है। प्राडा कंपनी द्वारा पंजाबी जूती की डिज़ाइन की नकल कर 50 हजार से 1 लाख रुपये तक के दामों पर बेचने की खबर सामने आते ही पंजाब के कारीगरों और दुकानदारों में गुस्से की लहर दौड़ गई है। उनका कहना है कि पंजाबी जूती हमारी साझा विरासत है, जिसे हमारे कारीगर दिन-रात मेहनत कर के तैयार करते हैं।

यह पहला मौका नहीं है जब प्राडा कंपनी पर सांस्कृतिक चोरी के आरोप लगे हों। इससे पहले भी कोल्हापुरी जूती की नकल कर के कंपनी विवादों में फंस चुकी है और माफी मांगनी पड़ी थी।

पंजाब के कारीगरों ने सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि “हमारी मेहनत और संस्कृति का ऐसा अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने सरकार को ज्ञापन सौंप कर मांग की है कि इस मामले में इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IPR) की रक्षा की जाए और विदेशी कंपनियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

कारीगरों का कहना है कि पंजाबी जूती सिर्फ एक फैशन आइटम नहीं है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक शान है, जिसकी रक्षा के लिए पंजाब के कारीगर अब एकजुट हो रहे हैं।

वहीं दुकानों पर आए ग्राहकों ने भी कहा कि पंजाबी जूती पंजाबियों की पहली पसंद है, लेकिन प्राडा कंपनी द्वारा इसकी नकल कर के महंगे दामों में बेचना बहुत ही निंदनीय है। ऐसा नहीं होना चाहिए।

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