पांच जिलों के राइस मिलर्स ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, समस्याओं का समाधान न हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
अमृतसर समेत पांच जिलों में धान की सरप्लस स्थिति से राइस मिलर्स परेशान, भंडारण और लिफ्टिंग को लेकर बढ़ी चिंता
-बिजली महंगी, मजदूरी बढ़ी और मिलिंग चार्ज पुराने; राइस मिलर्स बोले- लागत बढ़ी, आमदनी वहीं की वहीं
-15 सितंबर से शुरू होने वाले नए धान सीजन से पहले राइस मिलर्स ने सरकार से मांगा पुराना चावल जल्द उठाने का समाधान
अमृतसर राइस मिलर्स यूनियन के अध्यक्ष राजिंदर सलवान ने कहा कि अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, पठानकोट और होशियारपुर समेत पांच जिलों में धान की स्थिति पंजाब के अन्य क्षेत्रों से अलग है। इन जिलों में सरप्लस धान आता है और यहां राइस मिलों की संख्या भी काफी अधिक है। इसके चलते मिलर्स को हर सीजन में धान की खरीद, मिलिंग, भंडारण और सरकारी लिफ्टिंग से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
सलवान ने कहा कि इन पांच जिलों में धान अन्य मंडियों की तुलना में करीब 15 से 20 दिन पहले पहुंच जाता है। इसी कारण बड़ी मात्रा में धान दूसरे जिलों में चला जाता है और बाद में स्थानीय राइस मिलों को पर्याप्त मात्रा में धान उपलब्ध नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों को लेकर भी मिलर्स में असमंजस है। एक तरफ बाहर के जिलों से धान लाने के लिए किराया दिया जाता है, जबकि दूसरी तरफ तैयार चावल की बैक मूवमेंट का खर्च भी सरकार की ओर से दिया जाता है। इससे अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में बिजली की दरों में काफी वृद्धि हुई है, जबकि राइस मिलिंग के चार्ज लगभग वहीं के वहीं हैं। मजदूरी के रेट भी बढ़ गए हैं। मिलर्स को मिलने वाली ड्राईज पहले करीब दो प्रतिशत थी, जिसे इस बार बढ़ाकर लगभग चार प्रतिशत किया गया है, लेकिन इसके बावजूद लागत के मुकाबले मिलर्स को पर्याप्त राहत नहीं मिल रही।
सलवान ने आरोप लगाया कि पहले मिलर्स को ब्रोकन चावल के संबंध में अधिक गुंजाइश मिलती थी, लेकिन अब करीब 10 प्रतिशत तक की सीमा को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। वहीं एफआरके से जुड़े भुगतान और व्यवस्था को लेकर भी पिछले साल से समस्याएं बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी मुद्दों के कारण राइस मिलिंग कारोबार पर लगातार आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
राइस मिलर्स यूनियन की बैठक में पांच जिलों के प्रतिनिधियों ने मिलकर आगे की रणनीति पर चर्चा की। बैठक में अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, पठानकोट और होशियारपुर के प्रतिनिधि शामिल हुए। यूनियन नेताओं ने कहा कि पिछले दो-तीन वर्षों से ये समस्याएं लगातार उठाई जा रही हैं, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ। अब पांचों जिलों के मिलर्स को एकजुट होकर सरकार के सामने अपनी मांगें रखने का निर्णय लेना पड़ा है।
गुरदासपुर के जिला प्रधान बलविंदर सिंह हरूवाल ने कहा कि पंजाब में पिछले सीजन का करीब 35 प्रतिशत चावल अभी भी विभिन्न गोदामों और सेलरों में पड़ा हुआ है। एफसीआई के पास भी नए स्टॉक को रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने की समस्या सामने आ रही है। ऐसे में 15 सितंबर से शुरू होने वाले नए धान सीजन को लेकर मिलर्स चिंतित हैं कि नया धान कहां रखा जाएगा।
मिलर्स ने मांग की कि पिछले साल का चावल जल्द से जल्द उठाया जाए, ताकि नए सीजन के लिए सेलरों में जगह बनाई जा सके। उनका कहना है कि यदि पुराना स्टॉक समय पर नहीं उठाया गया तो नए धान की मिलिंग और भंडारण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
राइस मिलर्स ने सरकार से मिलिंग चार्ज बढ़ाने, बिजली बिलों में राहत देने, ड्राईज की उचित व्यवस्था करने और पुराने चावल की जल्द लिफ्टिंग करवाने की मांग की है। सलवान ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि अपनी इंडस्ट्री को बचाने के लिए है।
उन्होंने कहा कि पहले सरकार के साथ शांतिपूर्ण ढंग से बातचीत की जाएगी और पांचों जिलों की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल सरकार के समक्ष मांगपत्र रखेगा। यदि बातचीत के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो राइस मिलर्स सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार मिलर्स के साथ अन्याय नहीं करेगी और नए धान सीजन से पहले उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
