- रिपोर्ट: सुरजीत सिंह
चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अकाल तख्त द्वारा धार्मिक कदाचार का दोषी घोषित किए जाने के बाद अपनी सफाई देते हुए पूरे मामले को राजनीतिक साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि जिस वायरल वीडियो के आधार पर उन पर आरोप लगाए जा रहे हैं, वह उनका नहीं है और उन्हें जानबूझकर बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है।
भगवंत मान ने कहा कि अकाल तख्त ने उन्हें स्पष्टीकरण के लिए बुलाया था, जहां उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति वह नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की शारीरिक बनावट और अन्य चीजें उनसे मेल नहीं खातीं।
पंजाब के मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक आकाओं के इशारे पर धर्म का इस्तेमाल करके उनके खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार किसानों, खेती और पंजाब के विकास के लिए लगातार काम कर रही है, लेकिन कुछ लोगों को उनके फैसले स्वीकार नहीं हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अकाल तख्त सिख समुदाय की सर्वोच्च संस्था है और वह उसका सम्मान करते हैं, लेकिन राजनीतिक नियुक्तियों के कारण कुछ फैसलों पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने बेअदबी-रोधी कानून का भी जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने वह कदम उठाया है, जिसकी लंबे समय से मांग की जा रही थी।
वहीं, अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने सोमवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान को धार्मिक कदाचार का दोषी घोषित करते हुए उन्हें “गुरु दोखी” और “खालसा पंथ विरोधी” करार दिया। साथ ही सिख समुदाय से उनके साथ सामाजिक और धार्मिक संबंध समाप्त करने की अपील की गई।
अकाल तख्त ने यह भी घोषणा की कि पंजाब के सभी सिख विधायक और मंत्रिमंडल के सदस्य 29 जून को अकाल तख्त के समक्ष उपस्थित हों। इसके अलावा, पंजाब सरकार के जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 के कुछ प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई गई है।
अकाल तख्त का दावा है कि दो सरकारी फोरेंसिक लैब की जांच में वायरल वीडियो को वास्तविक पाया गया है और उसमें किसी प्रकार की एआई तकनीक या छेड़छाड़ नहीं की गई है। फिलहाल, यह विवाद पंजाब की राजनीति और धार्मिक संस्थाओं के बीच बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
