लखीसराय के चर्चित चिकित्सक दंपति को मरणोपरांत सम्मान

डीएम मिथिलेश मिश्र के हाथों पुरस्कार ग्रहण करते भावुक हो गईं बेटी डॉ. हरिप्रिया

लखीसराय(सरफराज आलम)सिनेयात्रा द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय कार्यक्रम “बिहार की सिनेयात्रा : रजतपट की विरासत” के प्रथम दिवस लखीसराय संग्रहालय का सभागार गौरव, आत्मीयता और सांस्कृतिक चेतना से ओत-प्रोत रहा। देश के विभिन्न हिस्सों से भी अनेक दर्शक ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। आयोजन दो सत्रों में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

प्रथम सत्र में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। लखीसराय के प्रसिद्ध चिकित्सक दम्पति स्वर्गीय डॉ. श्याम सुंदर प्रसाद सिंह एवं डॉ. राजकिशोरी सिंह को उनके सामाजिक एवं धार्मिक योगदान के लिए मरणोपरांत “सिनेयात्रा लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड 2026” से सम्मानित किया गया। सम्मान उनके पुत्र एवं अशोक धाम ट्रस्ट के सचिव डॉ. कुमार अमित, पुत्रवधू डॉ. रूपा सिंह, पुत्री डॉ. हरिप्रिया सिंह तथा दामाद डॉ. प्रभात कुमार ने ग्रहण किया। लंदन से उनके सुपुत्र सुमित कुमार भी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। सम्मान स्वरूप इक्कीस हजार रुपये की नगद राशि, स्मृति चिह्न, अंगवस्त्रम एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। इस सम्मान की घोषणा सिनेयात्रा के संस्थापक सचिव रविराज पटेल द्वारा स्व. डॉ. श्याम सुंदर प्रसाद सिंह की द्वितीय पुण्यतिथि पर की गई थी।

सम्मान ग्रहण करते समय डॉ. हरिप्रिया की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ने सेवा, सादगी और समाज के प्रति समर्पण को जीवन का उद्देश्य बनाया था। मंच से बोलते हुए वे कुछ क्षणों के लिए भावुक हो उठीं और कहा कि यह सम्मान केवल उनके परिवार का नहीं, बल्कि उन सभी मरीजों और लोगों का है जिनके विश्वास और आशीर्वाद से उनके माता-पिता ने अपना जीवन समाज को समर्पित किया। सभागार में मौजूद लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ परिवार के प्रति सम्मान प्रकट किया।

कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन डीएम मिथिलेश मिश्र, हाउस ऑफ वेराइटी के सचिव एवं पटना के रीजेंट सिनेमा के मालिक सुमन सिन्हा, कला संस्कृति पदाधिकारी सह संग्रहालय अध्यक्ष मृणाल रंजन तथा रविराज पटेल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

द्वितीय सत्र में भारत की पहली मगही फ़िल्म भैया का विशेष प्रदर्शन किया गया। शोध वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए रविराज पटेल ने बताया कि यह बिहार की क्षेत्रीय भाषा में बनी पहली फ़िल्म थी। फ़िल्म के लेखक-निर्देशक फणी मजूमदार थे, जबकि इसमें तरुण बोस, विजया चौधरी तथा अचला सचदेव ने प्रभावशाली अभिनय किया। संगीतकार चित्रगुप्त के संगीत और विन्द्यवासिनी देवी व प्रेम धवन के गीतों ने फ़िल्म को विशिष्ट पहचान दी। “सूपवे नरियरवे” गीत को लता मंगेशकर, आशा भोंसले, मोहम्मद रफ़ी एवं मन्ना डे ने स्वर दिया।

फ़िल्म प्रदर्शन के दौरान दर्शकों ने गहरी आत्मीयता के साथ सिनेमा का आनंद लिया। अपनी मातृभाषा मगही में बनी पहली फ़िल्म को बड़े पर्दे पर देखकर अनेक दर्शक भावुक हो उठे। कार्यक्रम ने क्षेत्रीय सिनेमा की गौरवशाली परंपरा को पुनर्जीवित करने का सशक्त संदेश दिया।

इस अवसर पर जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी मृणाल रंजन, 20 सूत्री के जिला उपाध्यक्ष दीपक कुमार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे

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