- रिपोर्ट: पंकज झा
वाराणसी। सुविधा साड़ी प्रतिष्ठान में बतौर मैनेजर-अकाउंटेंट कार्यरत रहते हुए करीब 70 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी एवं गबन के मामले में आरोपित सौरभ गुप्ता को अदालत से राहत नहीं मिली। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (षष्ठम) आलोक कुमार की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपित की डिफॉल्ट जमानत अर्जी खारिज कर दी। वादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने प्रभावी पैरवी की।
अभियोजन के अनुसार, अर्दली बाजार निवासी व्यवसायी देवानंद सेवारमानी (सप्पू) ने कैंट थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर में आरोप लगाया कि उनकी फर्म ‘सुविधा साड़ी’ में 26 जनवरी 2020 से मैनेजर-अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत सौरभ गुप्ता ने चार्टर्ड अकाउंटेंट संजय गुप्ता के साथ मिलकर फर्जी फर्मों के जरिए लगभग 70 लाख रुपये का गबन किया।आरोप है कि फर्म के भुगतान के लिए हस्ताक्षरित चेकों का दुरुपयोग करते हुए रकम ग्रीन सॉल्यूशन, स्काई लाइन वेव सॉल्यूशन और स्प्रिंट एशिया नामक फर्मों के खातों में ट्रांसफर की गई, जबकि इन फर्मों से वादी का कोई व्यावसायिक संबंध नहीं था। बैंक स्टेटमेंट की जांच के दौरान मामले का खुलासा हुआ। पूछताछ पर सौरभ गुप्ता टालमटोल करने लगा और अगले ही दिन मोबाइल बंद कर नौकरी छोड़कर फरार हो गया।
वादी का आरोप है कि जांच में पता चला कि उक्त तीनों फर्में सौरभ गुप्ता द्वारा फर्जी तरीके से संचालित की जा रही थीं और इनके बैंक खाते खुलवाने में सीए संजय गुप्ता ने सहयोग किया। मामले में सौरभ गुप्ता, उसके पिता राजेश गुप्ता, सीए संजय गुप्ता तथा संबंधित फर्मों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है।बताया गया कि 9 अप्रैल को निचली अदालत से नियमित जमानत अर्जी खारिज होने के बाद आरोपपत्र दाखिल होने पर आरोपित ने डिफॉल्ट जमानत की मांग की थी, जिसे अदालत ने सुनवाई के बाद अस्वीकार कर दिया। इससे पहले 2 जून को इलाहाबाद हाईकोर्ट भी आरोपित की जमानत याचिका खारिज कर चुका है।
