Nepal Earthquake: तबाही का वह मंजर जिससे थर्राया था नेपाल, 9,000 लोगों ने पलभर में गंवाई थी जान

7.9 से ज्यादा तीव्रता के भूकंप ने 25 अप्रैल 2015 को नेपाल को कर दिया था तबाह

नई दिल्ली। 25 अप्रैल 2015 को नेपाल के गोरखा जिले में 7.8 तीव्रता के उस भूकंप को भुला पाना बेहद मुश्किल है जिसमें नौ हजार लोगों की मौत हुई थी और करीब 50 हजार भवन नष्ट हो गए थे। नेपाल में आए इस विनाशकारी भूकंप को गोरखा भूकंप के नाम से भी जाना जाता है। भूकंप की वजह से काठमांडू का अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बंद करना पड़ा था और माउंट एवरेस्ट पर बर्फीला तूफान भी आ गया था…..

10 फीट आगे खिसक गया काठमांडू
यह भूकंप इतना तीव्र था कि इससे काठमांडू शहर लगभग 10 फीट यानि 3 मीटर आगे खिसक गया। विशेषज्ञों का कहना था कि काठमांडू घाटी के नीचे करीब 150 किलोमीटर (93 मील) और 50 किलोमीटर चौड़ा क्षेत्र दशकों के दवाब के आगे टिक नहीं सका और फॉल्ट लाइन के ऊपर की चट्टानें नीचली चट्टनों से दक्षिण की ओर खिसक गईं।

25 अप्रैल 2015 का भयावह दिन
25 अप्रैल 2015 सुबह 11:56 मिनट पर 7.8 या 8.1 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का अधिकेंद्र लामजुंग, नेपाल से 38 किमी दूर था। भूकंप के अधिकेंद्र की गहराई लगभग 15 किमी नीचे थी। भूकंप के झटके चीन, भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी महसूस किए गए। नेपाल के साथ-साथ चीन, भारत और बांग्लादेश में भी लगभग 250 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। भूकंप की वजह से एवरेस्ट पर्वत पर हिमस्खलन आ गया, जिससे 17 पर्वतारोहियों के मृत्यु हो गई। काठमांडू घाटी में यूनेस्को विश्व धरोहर समेत कई प्राचीन एतिहासिक इमारतों को नुकसान पहुंचा है। भूकंप के बाद के झटके 12 मई, 2015 तक भारत, नेपाल, चीन, अफगानिस्तान, पाकिस्तान व पड़ोसी देशों में महसूस किए जाते रहे। भूकंप का असर नेपाल के 39 जिलों में सबसे ज्यादा था। 11 जिलों के 20 लाख लोग बुरी तरह से इस भूकंप से प्रभावित हो गए थे।

भारत का योगदान
नेपाल में 2015 में आए विनाशकारी भूकंप के बाद सहायता और पुनर्वास कार्यों के लिए भारत ने करीब 96 करोड़ रुपये दिए थे। भारत ने गोरखा और नुवाकोट जिलों में 50,000 निजी आवास का पुनर्निर्माण कराने में मदद करने के लिए भी मदद भेजी थी।

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