Motilal Nehru Birth Anniversary: भारत का ऐसा स्वतंत्रता सेनानी जिसने स्वराज पार्टी की स्थापना में निभाई महत्वपुर्ण भुमिका

स्वतंत्र भारत के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू के पिता थे पण्डित मोतीलाल

नई दिल्ली। देश के बड़े नेताओं मे से एक मोतीलाल नेहरु देश के बड़े वकील थे लेकिन उस दौरान देश की स्थिति ऐसी थी कि उन्होंने उस उन्होंने अपनी वकालत छोड़ कर देश के हालत सुधारने में लग गए।

जीवन परिचय
मोतीलाल नेहरू का जन्म 6 मई, 1861 को आगरा में हुआ था। इनके पिता का नाम गंगाधर और मां का नाम जानुरानी (इंद्राणी) नेहरू था। इनके घर मे इनसे बड़े दो भाई तथा दो बहने थी। इनके सबसे बड़े भाई बंसीधर ब्रिटीश सरकार के न्यायिक विभाग मे कार्यरत थे। दूसरे भाई नन्दलाल राजपूताना मे खेत्री राज्य के दीवान के तौर पर नियुक्त थे। इनकी 2 बहने भी थी- पटरानी और महारानी

शिक्षा
मोतीलाल नेहरू ने कानपुर से मैट्रिक पास किया। इसके बाद इन्होंने इलाहाबाद के मुइर सेंट्रल कॉलेज से बीए मे दाखिला लिया पर बीए के अंतिम वर्ष मे उन्होंने अपनी आखरी परीक्षा नही दी और 1883 में इन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की तथा उसमे अच्छे अंको से पास हुए और वकील बन गये। मोतीलाल नेहरू को हिन्दी के साथ अंग्रेजी, अरबी तथा फारसी भाषा का भी ज्ञान था।

व्यक्तिगत जीवन
मोतीलाल नेहरू की पत्नी का नाम स्वरूपा रानी था। उनके 3 बच्चे थे- जवाहरलाल नेहरू और दो बेटियां विजयलक्षी पंडित और कृष्ण थी। कृष्णा आगे चलकर कृष्ण हठीसिंह के नाम से प्रसिद्ध हुई।

करियर
1896 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में मोतीलाल नेहरू ने अपने करियर की शुरूआत की थी। फिर वकालत छोड़कर उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। 1921 में उन्होंने 6 माह के लिए जेल की हवा भी खाई।

1923 में मोतीलाल ने स्वराज पार्टी को स्थापित करने में मदद की, जिसकी नीति केंद्रीय विधान सभा के लिए चुनाव जीतना और उसकी कार्यवाही को भीतर से बाधित करना था। 1928 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी की नेहरू रिपोर्ट लिखी, जो स्वतंत्र भारत के लिए एक भावी संविधान था, जो डोमिनियन स्टेटस देने पर आधारित था। अंग्रेजों द्वारा इन प्रस्तावों को अस्वीकार करने के बाद मोतीलाल ने 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया जो नमक मार्च अथवा दांडी मार्च से संबंधित था, जिसके लिए उन्हें जेल में डाल दिया गया था। रिहाई के तुरंत बाद उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु 1931 में इलाहबाद में हुई।

निधन
मोतीलाल नेहरू का निधन 6 फरवरी, 1931 को लखनऊ में हुआ।

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