पराली खेती में मिलाने से बढ़ती है जमीन की उर्वरा शक्ति

- कृषि व किसान कल्याण विभाग की टीमों व स्कूली विद्यार्थियों ने ग्रामीणों को किया जागरूक

ऐलनाबाद , 27 अक्टूबर ( एम पी भार्गव ): फसल अवशेष जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकने व पराली प्रबंधन के लिए ग्रामीण क्षेत्र में विद्यार्थियों व कृषि विभाग की ओर से जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। पराली जलाने से मित्र कीट के नष्टï होने, जमीन की उर्वरा शक्ति घटने व प्रदूषण की वजह से होने वाली परेशानियों को लेकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को ठोबरियां, मोडियाखेड़ा, मिठनपुरा, बुर्जकर्मगढ, रोड़ी, पनिहारी, गंगा, देसूमलकाना, अभोली, रत्ताखेड़ा, गिंदडख़ेड़ा, सक्ताखेड़ा, सुखेराखेड़ा, मल्लेवाला, अबूतगढ, मल्लेकां, अलीकां व जीवननगर आदि गांवों में स्कूली विद्यार्थियों व विभाग की टीमों ने ग्रामीणों को पराली न जलाने व फसल अवशेष प्रबंधन करने के लिए जागरूक किया। किसानों को बताया गया कि पराली जलाने से पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा होता है। यदि पराली न जला कर चारे के रूप में प्रयुक्त करें तो तूड़ी की डिमांड कम होगी और पशुओं को आसानी से चारा उपलब्ध रहेगा। इसके अलावा पराली की गांठे बनाकर भी अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त कर सकते हैं। जागरूकता कार्यक्रम में बताया गया कि पराली में आग लगाने से अनेक ऐसे जीव है जो खेत से बाहर नहीं निकल पाते और आग की चपेट में आकर नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा आग लगाने से पेड़ पौधों को भी नुकसान पहुंचता है, यदि पराली को खेत में ही मिला दिया जाए तो यह खेती की उर्वरा शक्ति को बढाने में कारगर है।

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