मिर्जापुर राजगढ़ थाना प्रभारी महेंद्र पटेल का फर्जीवाड़ा उजागर, आई जी आर एस (IGRS) रैंकिंग बढ़ाने के लिए दर्ज की फर्जी शिकायतें

  • रिपोर्ट- मंजय वर्मा

मिर्जापुर। राजगढ़ थाना प्रभारी महेंद्र पटेल पर उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी जनसुनवाई समाधान (IGRS) प्रणाली में फर्जी शिकायतें दर्ज कर रैंकिंग बढ़ाने का गंभीर आरोप लगा है। थाना प्रभारी ने अपने निजी मोबाइल नंबर का उपयोग कर फर्जी नामों और पतों से तीन शिकायतें दर्ज कीं, ताकि थाने का निस्तारण रिकॉर्ड बेहतर दिखे और रैंकिंग में पहला स्थान प्राप्त हो। इस फर्जीवाड़े ने पुलिस विभाग की साख को दांव पर लगा दिया है, जिससे जनता में आक्रोश और अविश्वास बढ़ रहा है।
फर्जी शिकायतों का खेल
सूत्रों के अनुसार, थाना प्रभारी महेंद्र पटेल ने IGRS पोर्टल पर तीन फर्जी शिकायतें (क्रमांक 40019925013219, 40019925013220, 40019925013221) दर्ज कीं। इन शिकायतों में कथित शिकायतकर्ताओं राजू, राजेश और राकेश, निवासी ग्राम कुड़ी, थाना राजगढ़, ने धमकी देने की शिकायत दर्ज की थी। जांच में पता चला कि न तो शिकायतकर्ता और न ही विपक्षी (राकेश कुमार पुत्र अजय, रमेश कुमार पुत्र संगम, राजू पुत्र रमेश) ग्राम कुड़ी के निवासी हैं। ग्राम प्रधान गुलाब मौर्य ने पुष्टि की कि ये नाम और पते पूरी तरह फर्जी हैं।
थाना प्रभारी ने इन शिकायतों में अपने निजी मोबाइल नंबर का उपयोग किया और निस्तारण के समय फर्जी जांच रिपोर्ट तैयार की, जिसमें अक्षांश (24.863711) और देशांतर (82.840996) जैसे विवरण भी शामिल किए गए। निस्तारण में यह दर्शाया गया कि शिकायतकर्ता कोई कानूनी कार्रवाई नहीं चाहता। संतुष्टि के लिए फीडबैक कॉल पर भी थाना प्रभारी ने स्वयं जवाब देकर कार्रवाई को सही ठहराया। एक उपनिरीक्षक के हस्ताक्षर भी दबाव में कराए गए।
जनता में रोष, पुलिस की साख पर सवाल
स्थानीय लोगों ने थाना प्रभारी की इस हरकत को शर्मनाक बताते हुए सवाल उठाया कि जब न्याय देने वाले ही फर्जीवाड़े में लिप्त होंगे, तो आम जनता कैसे भरोसा करेगी? क्षेत्र में चर्चा है कि थाना प्रभारी की मजबूत पकड़ के कारण उनकी जांच से लोग हिचकते हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच हो, ताकि अन्य संभावित फर्जीवाड़े का खुलासा हो सके।
IGRS प्रणाली का दुरुपयोग
IGRS (जनसुनवाई समाधान) उत्तर प्रदेश सरकार की एक पारदर्शी शिकायत निवारण प्रणाली है, जो नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करती है। इस प्रणाली में शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर जोर दिया जाता है, लेकिन राजगढ़ थाना प्रभारी ने फर्जी शिकायतें दर्ज कर इसकी विश्वसनीयता को ठेस पहुंचाई। इससे न केवल पुलिस विभाग की छवि धूमिल हुई, बल्कि सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही की नीति पर भी सवाल उठे हैं।
मांग और अपेक्षित कार्रवाई
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निम्नलिखित मांगें उठाई हैं:
उच्चस्तरीय जांच: थाना प्रभारी के खिलाफ स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच समिति गठित हो।
कानूनी कार्रवाई: फर्जी शिकायतें दर्ज करने और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के लिए आपराधिक मुकदमा दर्ज हो।
प्रणाली की मजबूती: IGRS पर फर्जी शिकायतों को रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश लागू किए जाएं।
पारदर्शिता: भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निस्तारण प्रक्रिया में फीडबैक और सत्यापन को अनिवार्य किया जाए।

राजगढ़ थाना प्रभारी महेंद्र पटेल का फर्जीवाड़ा न केवल पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि जनता के विश्वास को भी तोड़ता है। इस मामले ने IGRS जैसे महत्वाकांक्षी मंच की साख को खतरे में डाल दिया है। सरकार और पुलिस प्रशासन से अपेक्षा है कि इस संगीन मामले में तत्काल कार्रवाई हो, ताकि दोषियों को सजा मिले और जनता का भरोसा बहाल हो।

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