मिर्जापुर रेलवे स्टेशन: भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के खिलाफ सीएमआई की कार्रवाई, फिर भी अधूरी लड़ाई वर्षो से कुंडली मारे अधिकारी भ्रष्टाचार को दे रहे दावत

  • रिपोर्ट: मंजय वर्मा 

मिर्जापुर, जून 2025 मिर्जापुर रेलवे स्टेशन पर भ्रष्टाचार, गंदगी और अवैध अतिक्रमण के खिलाफ पत्रकार की शिकायत पर सहायक वाणिज्य प्रबंधक (सीएमआई) शंभू कुमार ने त्वरित कार्रवाई की। स्टेशन पर दुकानदारों ने आवंटित स्थान से अधिक जगह पर स्टॉल, डीप फ्रीजर और कार्टून रखे थे, जो हटाए गए। हालांकि, भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को खत्म करने में इस कार्रवाई की प्रभावशीलता संदेह के घेरे में है।

शिकायत से उजागर हुई अनियमितता ओ को लेकर
उत्तर मध्य रेलवे, प्रयागराज के सीएमआई को लिखित शिकायत में स्टेशन की गंभीर समस्याओं को उठाया। शिकायत में बताया गया कि सीसीटीवी दुकान क्षेत्र को कवर नहीं करते, जिससे अवैध गतिविधियां बढ़ रही हैं। प्लेटफॉर्म 1 पर पांच में से दो दुकानों ने अतिक्रमण कर लिया था, जबकि प्लेटफॉर्म 2-3 के बीच डीप फ्रीजर और सामान गलत जगह रखे गए थे। सूत्रों के अनुसार, कमर्शियल इंचार्ज सरद चौहान का भी दुकान में हिस्सा है।भ्रष्टाचार का गढ़
15 वर्षों से स्टेशन पर तैनात कमर्शियल इंचार्ज एस.के. अकेला, जो एनसीआरएमयू शाखा मंत्री भी हैं, पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप है। अकेला ने रेलवे बाउंड्री तोड़कर अपने आवास के लिए रास्ता बनवाया है। तत्काल टिकटों में 2000-3000 रुपये की कालाबाजारी और दलालों का नेटवर्क सक्रिय है। आरपीएफ प्रभारी दिनेश कुमार पर अवैध वसूली का आरोप है, जिसका मामला कोर्ट में है। हाल ही में कांस्टेबल हाथी पाड़े को 12 साल की सजा और जुर्माना अवैध वसूली के लिए हुआ, और एक अन्य सिपाही व कर्मी की जांच चल रही है।

गंदगी और सुरक्षा चिंताएं
पर्यावरण दिवस के बावजूद स्टेशन की सफाई व्यवस्था चरमराई है। टिकट काउंटर का फव्वारा कूड़ेदान बना, दीवारें पान-गुटखे से सनी हैं, और अधिकारी विश्रामगृह के पास का बाथरूम जो यात्रियों के लिए बनाया गया है गंदगी से भरा है। प्लेटफॉर्म 1 पर टूटे रास्ते और बिना नंबर की मोटरसाइकिलें सुरक्षा जोखिम बढ़ा रही हैं।पत्रकारों के साथ अभद्रता एसीएम के.सी. मीना के निरीक्षण के दौरान अकेला ने पत्रकारों को कवरेज से रोकने के लिए आरपीएफ बुलाकर थाने में बैठाया और 260 रुपये जुर्माना वसूला, जिसका वीडियो ट्विटर पर वायरल है। यह घटना स्टेशन पर पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार को दर्शाती है।
सीएमआई की कार्रवाई और सवाल एसी एम दिनेश कुमार व सीएमआई शंभू कुमार ने अतिक्रमण हटवाया और शिकायत दर्ज की, लेकिन जांच टीम के जाने के बाद दुकानदारों ने फिर अतिक्रमण शुरू कर दिया। दुकानों के टोकन, प्रत्येक कैंटीन के विक्रेताओं की जानकारी, ड्रेस कोड, और खाद्य पदार्थों की रेट लिस्ट का अभाव है। चाय की निर्धारित मात्रा और रेट ग्राहकों को नहीं दी जा रही, जिससे मनमानी बिक्री हो रही है। ने कार्रवाई पर संतुष्टि जताई, लेकिन वर्षों से जमे अधिकारियों के खिलाफ ठोस कदम कब उठेंगे, यह सवाल बरकरार है।कर्मचारी विवाद और मांगें एडीईएन संदीप दुबे के आवास पर कर्मचारी विवाद और पक्षपात से ड्यूटी प्रभावित है। एडीईएन पर दो बार हमले और गेट पिलर निर्माण में लापरवाही के आरोप हैं। यात्रियों और कर्मचारियों ने विजिलेंस-सीबीआई जांच, अधिकारियों के तबादले, संपत्ति जांच, और सीसीटीवी बढ़ाने की मांग की है।निष्कर्ष सीएमआई की कार्रवाई सकारात्मक है, लेकिन भ्रष्टाचार और अव्यवस्था की जड़ें बरकरार हैं। रेलवे बोर्ड को लंबे समय से तैनात अधिकारियों के खिलाफ कदम उठाने होंगे, वरना यह लड़ाई अधूरी रहेगी। पत्रकारों और यात्रियों की आवाज को मजबूत करने की जरूरत है ताकि स्टेशन पर सुशासन लाया जा सके।

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