भीम और हनुमान की मुलाकात: जब बजरंगबली की पूंछ भी नहीं हिला सके महाबली भीम
द्रौपदी के लिए दुर्लभ फूल लाने निकले भीम
नई दिल्ली/ अध्यात्म : महाभारत काल की एक रोचक घटना के अनुसार, एक बार द्रौपदी ने भीमसेन से गंधमादन पर्वत पर उगने वाला दुर्लभ सौगंधिक पुष्प लाने की इच्छा जताई। द्रौपदी की इस ख्वाहिश को पूरा करने के लिए भीम अकेले ही पर्वत की ओर निकल पड़े।
रास्ते में मिला एक साधारण-सा दिखने वाला वानर
गंधमादन पर्वत की ओर जाते समय भीम को रास्ते में एक वानर लेटा हुआ दिखाई दिया। वह वानर पूरी सड़क को घेरकर आराम कर रहा था, जिससे भीम को आगे बढ़ने में रुकावट हो रही थी।
भीम ने वानर को हटने का दिया आदेश
भीम ने उस वानर को एक सामान्य जीव समझकर उसे रास्ते से हटने को कहा। उन्होंने वानर से कहा कि उन्हें जल्दी गंधमादन पर्वत पहुँचना है, लेकिन वानर ने उठने से मना कर दिया।
वानर बोला – बीमार हूं, खुद रास्ता निकाल लो
वानर ने कहा, “मैं बीमार हूं, खड़ा नहीं हो सकता। अगर जल्दी है तो मेरी पूंछ हटाकर खुद ही रास्ता बना लो।” यह सुनते ही भीम को क्रोध आ गया।
भीम ने दिखाई अपनी वीरता, लेकिन असफल रहे
अपने बल और वीरता के घमंड में भीम ने वानर को चेतावनी दी और उसकी पूंछ उठाने की कोशिश की। पहले एक हाथ से, फिर दोनों हाथों से पूरी ताकत लगाई, लेकिन पूंछ टस से मस नहीं हुई।
जब भीम को आया अहसास – यह कोई साधारण वानर नहीं
पूरी कोशिश के बाद भी जब भीम पूंछ नहीं हिला पाए, तो उन्हें यह आभास हुआ कि यह कोई साधारण वानर नहीं है। उनका सारा घमंड चूर-चूर हो गया।
वानर ने किया अपने असली रूप का खुलासा
तभी वानर ने अपना असली रूप प्रकट किया और बताया कि वे भगवान राम के परम भक्त हनुमान जी हैं। वे भीम के बड़े भाई तुल्य हैं और बल, भक्ति व सेवा के प्रतीक हैं।
हनुमान जी ने दिया वरदान
हनुमान जी ने भीम को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन के रथ के ध्वज (झंडे) पर विद्यमान रहेंगे और पांडवों की रक्षा करेंगे।
सीख
यह कथा न केवल भीम के घमंड के टूटने की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सच्चा बल विनम्रता में है। हनुमान जी की उपस्थिति और आशीर्वाद ने पांडवों की विजय का मार्ग प्रशस्त किया।
