नई दिल्ली। जनवरी का महीना त्योहारों की दृष्टि से खास माना जाता है। इसी कड़ी में पंजाब का प्रमुख पर्व लोहड़ी मकर संक्रांति से एक दिन पहले पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है। सिख समुदाय के लिए लोहड़ी का विशेष महत्व है और इस दिन आग जलाकर उसकी परिक्रमा करने की परंपरा है।
लोहड़ी 2026 की तिथि और शुभ समय
इस वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी, ऐसे में लोहड़ी का पर्व 13 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। लोहड़ी का आयोजन सूर्यास्त के बाद किया जाता है। 13 जनवरी को सूर्यास्त का समय शाम 5 बजकर 44 मिनट है, इसके बाद के करीब दो घंटे का समय लोहड़ी मनाने के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
नई फसल की खुशी का पर्व
लोहड़ी को नई फसल की खुशी में मनाया जाता है। इस दिन घर के आसपास खुले स्थान पर लकड़ियां इकट्ठा कर अग्नि जलाई जाती है और उसमें तिल, गुड़, मूंगफली, रेवड़ी व नई फसल अर्पित की जाती है। मान्यता है कि पहली फसल अग्नि देव को अर्पित करने से देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है और पूरे वर्ष अच्छी फसल की कामना पूरी होती है।
अग्नि पूजन का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अग्नि को देवताओं का मुख माना गया है। इसलिए लोहड़ी के दिन अग्नि में नई फसल अर्पित करना देवताओं को अर्पित करने के समान माना जाता है। इस दौरान लोग लोकगीत गाते हैं, भांगड़ा और गिद्दा करते हैं तथा आपसी भाईचारे और खुशियों का पर्व मनाते हैं।
पौराणिक कथाएं भी जुड़ी हैं
एक पौराणिक कथा के अनुसार लोहड़ी का संबंध भगवान शिव और देवी सती से जुड़ा है। कहा जाता है कि राजा दक्ष के यज्ञ में शिवजी के अपमान से आहत होकर देवी सती ने अग्नि कुंड में देह त्याग दी थी। उसी बलिदान की स्मृति में लोहड़ी की अग्नि जलाने की परंपरा मानी जाती है।
वहीं एक अन्य मान्यता के अनुसार लोहड़ी मौसम परिवर्तन का प्रतीक भी है। इस पर्व के बाद सर्दी कम होने लगती है, इसलिए लोग आग जलाकर ठंड के विदा होने और नए मौसम के स्वागत का उत्सव मनाते हैं।
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डिस्क्लेमर- यहां दी गई जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं। khabrejunction.com इनकी पुष्टि नहीं करता।
