कृषि-नवप्रवर्तकों को सशक्त बनाने के लिए ‘क्षितिज-2.0’ की शुरुआत

  • रिपोर्ट: पंकज झा

वाराणसी। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर), वाराणसी ने राष्ट्रीय कृषि नवाचार निधि योजना के अंतर्गत ‘क्षितिज-2.0’ का शुभारंभ किया है। यह एक गतिशील इनक्यूबेशन कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य नवाचारपूर्ण विचारों को प्रोत्साहित करना, कृषि-आधारित उद्यमों को गति देना तथा वाराणसी, उत्तर प्रदेश और देशभर के अगली पीढ़ी के कृषि-नवप्रवर्तकों एवं स्टार्टअप्स को सशक्त बनाना है।

संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार के मार्गदर्शन में प्रारंभ किए गए इस कार्यक्रम का लक्ष्य कृषि क्षेत्र में एक सशक्त एवं जीवंत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है। इसके अंतर्गत फसल उत्पादन, कटाई-पश्चात प्रबंधन, प्रसंस्करण, आपूर्ति श्रृंखला तथा संबद्ध कृषि उद्यमों सहित संपूर्ण कृषि मूल्य श्रृंखला में नवाचारी समाधानों को प्रोत्साहन और सहयोग प्रदान किया जाएगा।

‘क्षितिज-2.0’ स्थानीय नवप्रवर्तकों, युवा उद्यमियों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं तथा उभरते स्टार्टअप्स को उनके नवाचारी विचारों को व्यावसायिक रूप से सफल और बाजार-तैयार उद्यमों में विकसित करने के लिए एक प्रभावी मंच उपलब्ध कराएगा।

इस कार्यक्रम के लिए ऑनलाइन आवेदन पोर्टल 1 जुलाई से 21 जुलाई 2026 तक खुला रहेगा। कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में नवाचार आधारित समाधान विकसित करने वाले नवप्रवर्तकों, उद्यमियों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स तथा कृषि-आधारित उद्यमों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

चयनित स्टार्टअप्स को विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, उद्यमिता प्रशिक्षण, अत्याधुनिक शोध प्रयोगशालाओं एवं अन्य अवसंरचनात्मक सुविधाओं तक पहुंच, प्रोटोटाइप विकास एवं सत्यापन, बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) और व्यावसायीकरण संबंधी सहायता के साथ-साथ उद्योग जगत के विशेषज्ञों, निवेशकों एवं विभिन्न पारिस्थितिकी तंत्र साझेदारों के साथ नेटवर्किंग के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

अग्रिबिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर, वाराणसी के अनुसार, ‘क्षितिज-2.0’ को उच्च संभावनाओं वाले नवाचारों के लिए एक लॉन्चपैड के रूप में विकसित किया गया है, जो जमीनी स्तर पर प्रभाव उत्पन्न करने के साथ-साथ भारत के कृषि परिवर्तन में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। यह कार्यक्रम स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने, नवाचार-आधारित विकास को सुदृढ़ बनाने तथा कृषि स्टार्टअप्स को आत्मविश्वास के साथ विस्तार करने के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

परियोजना के मुख्य अन्वेषक डॉ. सुदर्शन मौर्य ने बताया कि पात्रता, आवेदन प्रक्रिया एवं विस्तृत दिशानिर्देश संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध होंगे। इच्छुक अभ्यर्थी उपलब्ध कराए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर अथवा ऑनलाइन आवेदन पत्र भरकर आवेदन कर सकते हैं।

About The Author

Leave A Reply

Your email address will not be published.