Keshav Prasad Maurya UCC Statement: UCC पर केशव मौर्य का विपक्ष पर हमला, बोले- मुस्लिम वोट बैंक के लिए किया जा रहा विरोध

Keshav Prasad Maurya UCC Statement:  उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। 17 सितंबर 2026 को सामने आए उनके बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष UCC का विरोध मुस्लिम वोट बैंक को ध्यान में रखकर कर रहा है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में UCC को लागू करने को लेकर राजनीतिक बहस तेज है।

UCC को लेकर क्या बोले केशव प्रसाद मौर्य?

केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता का विरोध केवल मुस्लिम वोट बैंक के लिए किया जा रहा है। उन्होंने UCC को भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख वैचारिक मुद्दों में से एक बताया है।

इससे एक दिन पहले आजमगढ़ में भी मौर्य ने UCC को लेकर कहा था कि यह बीजेपी का वैचारिक मुद्दा है। उन्होंने कहा था कि जिन राज्यों में बीजेपी या NDA की सरकार है, वहां UCC लागू किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि जिन राज्यों में फिलहाल बीजेपी या NDA की सरकार नहीं है, वहां भविष्य में सरकार बनने के बाद इसे लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

UCC को लेकर क्यों बढ़ी राजनीतिक बहस?

समान नागरिक संहिता को लेकर हाल के दिनों में केंद्र और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA शासित राज्यों में UCC लागू किया जाएगा। इसके बाद अलग-अलग विपक्षी नेताओं और संगठनों ने इस पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

UCC का उद्देश्य देश में व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े कुछ मामलों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। इसका संबंध विवाह, तलाक, विरासत और परिवार से जुड़े कुछ नागरिक मामलों से हो सकता है। हालांकि, UCC के स्वरूप और इसके लागू होने के तरीके को लेकर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर अलग-अलग मत हैं।

विपक्ष की ओर से क्या आपत्ति जताई जा रही है?

UCC के विरोध में अलग-अलग नेताओं और संगठनों ने अलग-अलग तर्क दिए हैं। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने कहा है कि UCC धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान में दिए गए अधिकारों से जुड़ा विषय है। उन्होंने UCC को लेकर केंद्र सरकार की योजना का विरोध किया है और इस मुद्दे पर उत्तराखंड हाईकोर्ट में कानूनी चुनौती का भी उल्लेख किया है।

समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन ने भी UCC को लेकर आपत्ति जताई है। उनके अनुसार अलग-अलग धर्मों की धार्मिक परंपराओं और व्यक्तिगत कानूनों को देखते हुए इसे लागू करना आसान नहीं होगा। इस तरह UCC को लेकर समर्थकों और विरोध करने वाले पक्षों के तर्क अलग-अलग हैं।

बीजेपी की ओर से UCC पर क्या कहा जा रहा है?

बीजेपी और उसके सहयोगी दल UCC को एक समान नागरिक कानून की दिशा में महत्वपूर्ण मुद्दा बताते रहे हैं। केशव प्रसाद मौर्य ने भी इसे बीजेपी के वैचारिक मुद्दे के तौर पर बताया है। उनके मुताबिक बीजेपी और NDA शासित राज्यों में इसे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।

UCC को लेकर हालिया बहस में राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। एक तरफ बीजेपी नेता इसे अपने वैचारिक एजेंडे का हिस्सा बता रहे हैं, जबकि विपक्षी नेता और कुछ सामाजिक-धार्मिक संगठन इसके संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

UCC पर आगे क्या होगा?

फिलहाल UCC को लेकर देश में राजनीतिक और कानूनी चर्चा जारी है। अलग-अलग राज्यों में इसके लागू होने की स्थिति, इसके प्रावधान और धार्मिक एवं व्यक्तिगत कानूनों पर इसके प्रभाव को लेकर बहस चल रही है।

उत्तर प्रदेश में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का ताजा बयान इसी व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा है। उन्होंने विपक्ष के UCC विरोध को मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति से जोड़कर देखा है, जबकि विपक्षी नेताओं और संगठनों ने UCC के संवैधानिक, धार्मिक और कानूनी पहलुओं पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

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