भारतीय दूतावास ने जारी की एडवाइजरी, ईरान में बढ़ते खतरे को देखते हुए गैर-जरूरी यात्रा टालने की अपील

नई दिल्ली: ईरान में तेजी से बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने भारतीय नागरिकों से ईरान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है। भारत के तेहरान स्थित दूतावास ने बुधवार को एक यात्रा परामर्श (ट्रैवल एडवाइजरी) जारी करते हुए कहा:

“पिछले कुछ हफ्तों में सुरक्षा से जुड़े हालातों को ध्यान में रखते हुए, भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे ईरान की गैर-जरूरी यात्रा करने से पहले स्थिति का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करें।”

जो भारतीय ईरान में हैं, उनके लिए वापसी के विकल्प उपलब्ध
दूतावास ने यह भी बताया कि ईरान में पहले से मौजूद भारतीय नागरिक, जो वापस लौटना चाहते हैं, वे व्यावसायिक उड़ानों या फेरी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं, जो इस समय उपलब्ध हैं।

साथ ही यह भी सलाह दी गई कि “भारतीय नागरिक क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर नजर बनाए रखें और भारत सरकार द्वारा जारी नवीनतम एडवाइजरी का पालन करें।”

https://x.com/India_in_Iran/status/1945190015501234391

क्यों जारी की गई एडवाइजरी? जानिए सुरक्षा हालात
यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं।

  • 13 जून को इज़राइल ने ‘ऑपरेशन राइजिंग लायन’ शुरू कर ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर बमबारी की।
  • इसके जवाब में ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए इज़राइल को निशाना बनाया।
  • अमेरिका ने इज़राइल का समर्थन करते हुए 22 जून को Fordow, Natanz और Isfahan स्थित ईरानी परमाणु केंद्रों पर हमला किया।
  • ईरान ने इसके बदले इज़राइल के कब्जे वाले क्षेत्रों और कतर स्थित अमेरिकी एयरबेस पर जवाबी हमले किए।

12 दिन तक चले इस युद्ध का अंत 24 जून को इज़राइल द्वारा एकतरफा संघर्ष विराम की घोषणा के साथ हुआ, जिसकी घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की थी।

परमाणु समझौता और मौजूदा संकट की पृष्ठभूमि

  • जुलाई 2015 में ईरान और विश्व शक्तियों के बीच जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) नामक परमाणु समझौता हुआ था।
  • इस समझौते के तहत ईरान ने अपने यूरेनियम संवर्धन को 3.67% तक सीमित किया और स्टॉकपाइल को 300 किलो तक घटाया।
  • लेकिन 2018 में ट्रंप सरकार ने अमेरिका को इस समझौते से बाहर निकाल लिया।
  • इसके बाद से ईरान ने परमाणु संवर्धन की सीमाएं पार करते हुए यूरेनियम को 60% तक संवर्धित करना शुरू किया, जो हथियार-ग्रेड स्तर के बेहद करीब है।

ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ नागरिक उद्देश्यों के लिए है, जबकि अमेरिका इसे परमाणु बम बनाने की दिशा में उठाया गया कदम मानता है।

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