नई दिल्ली: भारत के लिए मानसून 2026 चिंता का विषय बनता जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति विकसित हो चुकी है और आने वाले महीनों में इसके और मजबूत होने की संभावना है। इस घटनाक्रम ने भारत के मानसून को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं, क्योंकि इतिहास गवाह है कि अल नीनो का असर अक्सर देश में सामान्य से कम बारिश के रूप में देखने को मिलता है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने भी अपने ताजा पूर्वानुमान में मानसून को लेकर अनुमान घटाया है। विभाग के अनुसार जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) का लगभग 90 प्रतिशत रह सकती है, जो सामान्य से कम मानी जाती है।
क्या है अल नीनो?
अल नीनो एक जलवायु संबंधी घटना है, जिसमें मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर के समुद्री जल का तापमान सामान्य से अधिक बढ़ जाता है। समुद्र के तापमान में यह बदलाव दुनिया भर के मौसम चक्र को प्रभावित करता है। भारत में इसका सबसे बड़ा असर दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ता है, जिससे बारिश कमजोर हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो बनने पर वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव आता है, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप तक नमी पहुंचाने वाली प्रणालियां कमजोर पड़ सकती हैं।
बारिश कम हुई तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें
यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है, तो इसका सीधा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है। देश के बड़े हिस्से में खेती अब भी बारिश पर निर्भर है। कम बारिश होने से धान, दाल, तिलहन और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा जलाशयों में पानी का स्तर घटने, पेयजल संकट बढ़ने और बिजली उत्पादन पर दबाव जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
गर्मी भी बढ़ा सकता है अल नीनो
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो केवल बारिश को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि तापमान में भी वृद्धि कर सकता है। कई इलाकों में सामान्य से अधिक गर्मी और लंबे समय तक हीटवेव जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि पहले से बढ़ते वैश्विक तापमान के बीच अल नीनो का प्रभाव और अधिक महसूस किया जा सकता है। इससे मौसम की चरम घटनाओं की संभावना बढ़ सकती है।
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क्या पूरे देश में पड़ेगा समान असर?
मौसम विभाग के अनुसार देश के सभी हिस्सों में स्थिति एक जैसी नहीं रहेगी। कुछ क्षेत्रों में सामान्य बारिश हो सकती है, जबकि मध्य भारत, दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र और मानसून पर निर्भर कई इलाकों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज होने की आशंका है।
यही वजह है कि कृषि विशेषज्ञ और राज्य सरकारें अभी से संभावित परिस्थितियों के लिए तैयारी करने की सलाह दे रही हैं।
लगातार निगरानी रख रहे वैज्ञानिक
मौसम वैज्ञानिक प्रशांत महासागर की परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। हालांकि मानसून के अंतिम प्रदर्शन को लेकर अभी भी कुछ अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन अल नीनो के मजबूत होने के संकेतों ने चिंता बढ़ा दी है।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यदि अल नीनो का प्रभाव अनुमान के अनुरूप बढ़ता है, तो भारत को कमजोर मानसून, तेज गर्मी और कृषि क्षेत्र पर बढ़ते दबाव जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। आने वाले हफ्तों में मौसम विभाग के नए पूर्वानुमान स्थिति को और स्पष्ट करेंगे।
