ऐलनाबाद की भव्य श्रीरामलीला में श्रीराम-लक्ष्मण ने किया राक्षसी ताड़का का वध

समाजसेवी राधेश्याम छापोला ने की आरती, पंडाल दर्शकों से खचाखच भरा

ऐलनाबाद, ( एम पी भार्गव )शहर के श्री गौशाला मार्ग पर स्थित श्री रामलीला कमेटी के बैनर तले वृंदावन से आये कलाकारों की भव्य श्रीरामलीला का मंचन तीसरे दिन भी जारी रहा। मध्यरात्रि तक चली श्री रामलीला को देखने हज़ारों महिला पुरुष दर्शक पहुंचे जिससे पंडाल में तिल धरने की जगह भी शेष नही बची। श्रीरामलीला कमेटी के कार्यकर्ताओं को भीड़ को काबू रखने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। तीसरे दिन की श्रीरामलीला के प्रारंभ में स्थानीय समाजसेवी राधेश्याम छापोला, उनके साथियों व कमेटी के सदस्यों ने सामुहिक रूप से भगवान श्री शंकर जी की आरती की। तीसरे दिन की श्रीरामलीला के प्रारंभ में अयोध्या के महाराजा दशरथ के घर चार पुत्रो के जन्म का समाचार उनके राजदरबार में पहुंचता है। हास्य कलाकार बीएम नागर व उनकी टीम के सदस्य किन्नरों के वेष में महाराजा दशरथ के दरबार मे पहुंचते है और नाच गाकर उनसे चार पुत्रों के जन्म की बधाई मांगते है। महाराजा दशरथ भी यह खुशखबरी सुनकर अति प्रसन्न होते है और उनको खूब सारी बधाई देकर विदा करते है। इधर जंगलों में राक्षसों के आतंक से ऋषि मुनि बहुत दुःखी है। जिसके कारण वे गुस्से में आकर आग बबूला होकर महाराजा दशरथ के पास पहुंचकर अपनी परेशानी उनसे जाकर बताते है। वे राक्षसों के संहार के लिए उनके दो पुत्रों श्रीराम और लक्ष्मण को मांगते है। लेकिन महाराजा दशरथ बच्चों को नादान बालक मानकर उन्हें भेजने से मना कर देते है। लेकिन ऋषि विश्वामित्र के समझाने पर थोड़ी ना-नुकर के बाद महाराज दशरथ मान जाते है और अपने दो राजकुमारों श्रीराम और लक्ष्मण को ऋषि विश्वामित्र को सौंप देते है। ऋषि विश्वामित्र दोनो राजकुमारों को अपने साथ लेकर अपनी कुटिया की ओर चल पडते है। रास्ते मे उनका सामना खतरनाक राक्षसी ताड़का से होता है जो कई रूप धारण करके उन्हें परेशान करने लगती है। इस बीच राक्षसी ताड़का उन पर हमला भी कर देती है। यह देख ऋषि विश्वामित्र राजकुमार श्रीराम-लक्ष्मण को इस हमले का जवाब देने को कहते है। श्रीराम-लक्ष्मण और राक्षसी ताड़का में भयंकर युद्ध होता है। जिसमे राक्षसी ताड़का मारी जाती है। जब वह भयंकर चित्कार के साथ ढेर हुई तो वहां मौजूद दर्शकों ने श्रीराम-लक्ष्मण का जयघोष लगाया। श्रीराम-लक्ष्मण ने ऋषि विश्वामित्र के चरण छूकर आशीर्वाद लिया। राक्षसी ताड़का की मौत का समाचार जब अन्य राक्षसों मारीच-सुबाहु तक पहुंचती है तो वे गुस्से में तिलमिला उठते है और राक्षसी ताड़का की मौत का बदला लेने ऋषि विश्वामित्र की कुटिया पर पहुंच जाते है। सभी राक्षस मिलकर उनपर हमला कर देते है लेकिन श्रीराम-लक्ष्मण की जोड़ी के साथ हुए युद्ध मे राक्षस सुबाहु कई अन्य राक्षसों के साथ मारा जाता है जबकि राक्षस मारीच घायल होकर मौके से भाग जाता है। जिस ओर वहां उपस्थित दर्शकों ने खूब तालियां बजाई और जय श्री राम के जयघोष के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। वहां उपस्थित दर्शकों ने वृंदावन से आये श्री रामलीला के कलाकारों के अभिनय को खूब सराहा। इस अवसर पर श्रीरामलीला कमेटी के उपाध्यक्ष ओपी पारीक, कोषाध्यक्ष व सचिव राजेश वर्मा, सह सचिव प्रवीण फुटेला, प्रेस प्रवक्ता सुभाष चौहान, कला मंच के डायरेक्टर अशोक जसरासरिया, कला मंच के अध्यक्ष सुखराम वर्मा, बीएम नागर, सुल्तान शर्मा, देवेंद्र गोयल, बसंत सरिया, गजानंद स्वामी, अनिल मलेठिया, विनोद बेहरवाला, अरुण भादू व सुरेश पारीक, त्रिलोक जोशी, मुरारी जसरसरिया, धर्मवीर धोकरवाल, सोनू बत्तरा, मनीष मक्कड़, अंकित जिंदल, नवशेर मान, टीकम चोटिया, नरोत्तम अग्रवाल व मनदीप सिंह सहित अन्य कई गणमान्य जन भी उपस्थित थे।

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