ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर साफ दिखाई देने लगा है। जंग जैसे हालात बनने से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। तेल कंपनियों पर बढ़ते दबाव और घाटे को देखते हुए देश में पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार बढ़ाए जा रहे हैं।
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में मिडिल ईस्ट में युद्ध, समुद्री मार्गों पर खतरा या तेल सप्लाई में कमी का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होते ही देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने लगी हैं।
सोमवार को एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी की गई। 25 मई को पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ। इसके बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। इससे पहले 15, 19 और 23 मई को भी कीमतों में इजाफा किया गया था। पिछले 11 दिनों में पंजाब में पेट्रोल 7.25 रुपये और डीजल 7.55 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है।
सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे कच्चे तेल के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है।
भारत में रोजाना लगभग 90 से 95 करोड़ लीटर पेट्रोलियम उत्पादों की खपत होती है। इसमें डीजल की खपत सबसे ज्यादा 25 से 30 करोड़ लीटर प्रतिदिन है, जबकि पेट्रोल की खपत 10 से 12 करोड़ लीटर रोजाना रहती है। वहीं, हर दिन करीब 50 लाख गैस सिलेंडर की डिलीवरी की जाती है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri के अनुसार, भारत के पास फिलहाल करीब 4,000 करोड़ लीटर तेल का बफर स्टॉक मौजूद है, जिससे देश की जरूरतें लगभग 55 से 60 दिनों तक पूरी की जा सकती हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात और बिगड़े तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के दामों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
तेल की कीमतें बढ़ने का असर सिर्फ वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा। मालभाड़ा बढ़ने से सब्जियां, फल, राशन और अन्य जरूरी सामान महंगे हो सकते हैं। खेती की लागत बढ़ने से किसानों पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसके अलावा बस, ऑटो और स्कूल वाहनों के किराए में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
इस बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी लोगों से पेट्रोल, डीजल और गैस का संयमित इस्तेमाल करने की अपील की है। उन्होंने कहा था कि भारत के पास अपने बड़े तेल भंडार नहीं हैं, इसलिए देशवासियों को ईंधन की बचत को लेकर गंभीर होना होगा।
