पंजाब। ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब विदेश जाने वाले भारतीय, खासकर पंजाबी विद्यार्थियों पर साफ दिखने लगा है। गल्फ देशों का एयरस्पेस बंद होने के कारण अमेरिका और कनाडा की यात्रा का खर्च दो से ढाई गुना तक बढ़ गया है।
जानकारी के अनुसार, पहले जहां अमेरिका और कनाडा के लिए एक तरफ का हवाई किराया 70 से 80 हजार रुपये होता था, वहीं अब यह बढ़कर ढाई से तीन लाख रुपये तक पहुंच गया है। मिडिल ईस्ट में तनावपूर्ण हालात के चलते अब तक करीब 46 हजार उड़ानें प्रभावित हो चुकी हैं।
एयरस्पेस बंद होने के कारण एयरलाइंस को अपने रूट बदलने पड़े हैं और अब उड़ानें यूरोप के ऊपर से होकर संचालित की जा रही हैं। इससे न केवल यात्रा का समय बढ़ गया है, बल्कि जोखिम भी पहले की तुलना में अधिक हो गया है।
इस स्थिति से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों में चिंता का माहौल है। बढ़ते खर्च और लंबी यात्रा के कारण कई छात्र अब अपने विदेश जाने के फैसलों पर पुनर्विचार कर रहे हैं।
इमिग्रेशन विशेषज्ञ बिक्रम झब्बाल के अनुसार, इस वैश्विक तनाव का सीधा असर हवाई यात्रा पर पड़ा है, जिससे अमेरिका और कनाडा जाना महंगा और जटिल हो गया है।
उन्होंने बताया कि अब पंजाब के विद्यार्थियों का रुझान जर्मनी, नीदरलैंड और लक्ज़मबर्ग जैसे देशों की ओर बढ़ रहा है। इन देशों में पढ़ाई और रहने का खर्च अपेक्षाकृत कम है, रोजगार के अवसर बेहतर हैं और सुरक्षा भी अधिक मानी जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव इसी तरह बना रहा, तो आने वाले समय में विदेश शिक्षा के रुझान में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
