गुस्ताखी माफ हरियाणा- पवन कुमार बंसल
“साढ़े नौ साल में हरियाणा का बंटाधार, दिल्ली में वजीर… पर दिल अभी भी हरियाणा में!”
मिलो हरियाणा के ‘काबा’ यानी मनोहर बाबा से। साढ़े नौ साल सत्ता में रहकर प्रदेश का बंटाधार करने के बाद अब दिल्ली की कुर्सी मिली है, लेकिन दिल आज भी हरियाणा में ही अटका हुआ है।
“मन्ने हरियाणा की याद सतावे, मन्ने आवे हिचकी” — यही हाल है जनाब का। कुर्सी दिल्ली में, पर नजरें और सियासत अब भी हरियाणा के इर्द-गिर्द घूमती दिखती हैं।
सवाल ये है कि क्या हरियाणा की जनता अब भी इनकी ‘हिचकी’ को समझेगी, या फिर बीते साढ़े नौ साल का हिसाब मांगेगी?
