Harish Rawat on Congress: ‘कांग्रेस का कोई कार्यक्रम तो चल ही नहीं रहा’, अपनी ही पार्टी पर बरसे हरीश रावत
Harish Rawat on Congress: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत एक बार फिर अपनी ही पार्टी के संगठन और कार्यक्रमों को लेकर चर्चा में हैं। अपनी ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर पार्टी के भीतर उठ रहे सवालों के बीच हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा को गलत तरीके से समझा गया है और इसी वजह से वह आगे की 8-10 रैलियां स्थगित कर रहे हैं।
हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में बताया कि वह 7 अक्टूबर को उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा से मुलाकात करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि एक दिन की यात्रा को लेकर वह कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल से पहले ही माफी मांग चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में कांग्रेस की गतिविधियों को लेकर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि उनकी समझ में यह नहीं आ रहा कि इन दिनों कांग्रेस का कोई कार्यक्रम चल ही नहीं रहा है।
रावत के इस बयान के बाद उत्तराखंड कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। खास बात यह है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब राज्य में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हो चुकी हैं।
Harish Rawat on Congress:संगठित जनसंपर्क अभियान नहीं दिख रहा: हरीश रावत
हरीश रावत ने अपनी बात रखते हुए कहा कि कुछ जगहों पर कांग्रेस के एक-दो प्रदर्शन जरूर होते हैं और वह उनमें शामिल भी होते हैं। लेकिन उनके मुताबिक जिलों, ब्लॉकों, सड़कों और ग्रामीण इलाकों में कोई व्यापक और संगठित जनसंपर्क अभियान दिखाई नहीं दे रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस की तरफ से कोई संगठित जनसंपर्क अभियान नहीं चल रहा है, तो उनकी धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा से पार्टी के कार्यक्रमों में कमजोरी कैसे आ रही है।
रावत का यह बयान सीधे तौर पर कांग्रेस के जमीनी संगठन और जनसंपर्क गतिविधियों को लेकर उनकी चिंता को सामने रखता है। हालांकि, उनकी यात्रा को लेकर पार्टी नेतृत्व की ओर से पहले ही आपत्ति जताई जा चुकी थी। कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने रावत से यात्रा के कार्यक्रमों को आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह किया था।
रावत ने अपनी ओर से यह भी स्पष्ट किया कि उनकी यात्रा का उद्देश्य कांग्रेस के खिलाफ कोई समानांतर राजनीतिक गतिविधि चलाना नहीं था। उनका कहना है कि वह जनता से संवाद करने और लोगों के बीच अपनी बात रखने के लिए यात्रा कर रहे थे।
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Harish Rawat on Congress: यात्रा को लेकर कांग्रेस नेतृत्व से मतभेद
हरीश रावत की धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा को लेकर कांग्रेस के भीतर मतभेद उस समय सामने आए, जब पार्टी नेतृत्व ने इस तरह के अलग कार्यक्रमों पर सवाल उठाए। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा की ओर से रावत को यात्रा को लेकर पत्र भी भेजा गया था। पार्टी की चिंता थी कि चुनाव से पहले संगठन के आधिकारिक कार्यक्रमों से अलग किसी समानांतर कार्यक्रम से पार्टी की रणनीति और एकजुटता प्रभावित हो सकती है।
इसके बावजूद हरीश रावत ने जसपुर से हल्द्वानी तक अपनी यात्रा जारी रखी। इस दौरान कई कांग्रेस नेता और उनके समर्थक भी उनके साथ दिखाई दिए। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, यात्रा में विधायक प्रीतम सिंह, तिलक राज बेहड़, हरीश धामी, मनोज तिवारी, आदेश चौहान, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण, हिमेश खर्कवाल और पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा सहित कई नेता मौजूद रहे।
इससे उत्तराखंड कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर चर्चाएं और तेज हुईं। हालांकि, हरीश रावत ने यात्रा के दौरान पार्टी में गुटबाजी या बगावत की बात स्वीकार नहीं की।
Harish Rawat on Congress: ‘यात्रा को गलत समझा गया’, अब आगे की रैलियां स्थगित
हरीश रावत ने अपनी ताजा सफाई में कहा कि उनकी यात्रा को गलत समझा गया है। इसी वजह से उन्होंने आगे की 8-10 रैलियां स्थगित करने की बात कही है।
रावत के मुताबिक, वह पार्टी नेतृत्व के सामने अपना पक्ष रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि 7 अक्टूबर को कुमारी शैलजा से मुलाकात होगी। इस मुलाकात में यात्रा को लेकर पैदा हुए विवाद और पार्टी संगठन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है।
इससे पहले रावत ने यह भी संकेत दिया था कि अगर कांग्रेस संगठन की ओर से अपना व्यापक अभियान शुरू किया जाता है, तो वह पार्टी के कार्यक्रमों के साथ आगे बढ़ने को तैयार हैं। उन्होंने कहा था कि उनकी जनसंवाद यात्रा का शुरुआती उद्देश्य प्रदेश कांग्रेस को सक्रिय करना था।
Harish Rawat on Congress: 2027 चुनाव से पहले अहम है कांग्रेस की एकजुटता
उत्तराखंड की राजनीति में हरीश रावत कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। ऐसे में उनकी ओर से संगठन की सक्रियता पर सवाल उठाया जाना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कांग्रेस के सामने आने वाले चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती अपने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की है। ऐसे में वरिष्ठ नेता की अलग यात्रा और पार्टी संगठन के कार्यक्रमों के बीच तालमेल का मुद्दा स्वाभाविक रूप से चर्चा में आता है।
दूसरी ओर, हरीश रावत का कहना है कि वह जनता के बीच जाकर लोगों से संवाद कर रहे हैं। उनके अनुसार, यात्रा का उद्देश्य प्रदेश के मुद्दों को उठाना और कांग्रेस को मजबूत करना है। ऐसे में उनके बयान को पार्टी विरोधी कदम के बजाय संगठन को सक्रिय करने की उनकी कोशिश के रूप में भी देखा जा सकता है।
फिलहाल रावत ने आगे की 8-10 रैलियां स्थगित करने की बात कही है। साथ ही पार्टी नेतृत्व से बातचीत का रास्ता भी खुला रखा है। ऐसे में अब नजर 7 अक्टूबर को होने वाली उनकी कुमारी शैलजा से मुलाकात पर रहेगी।
हरीश रावत और कांग्रेस संगठन के बीच बातचीत के बाद यह साफ हो सकता है कि उनकी आगे की राजनीतिक गतिविधियां किस रूप में जारी रहेंगी। यदि पार्टी और रावत के बीच समन्वय बनता है, तो उनकी जनसंपर्क क्षमता का इस्तेमाल कांग्रेस के अभियान में किया जा सकता है। वहीं, अगर संगठन और व्यक्तिगत कार्यक्रमों को लेकर मतभेद जारी रहते हैं, तो उत्तराखंड कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में यह मुद्दा आगे भी चर्चा में रह सकता है।
फिलहाल हरीश रावत का संदेश साफ है कि वह कांग्रेस के साथ हैं, लेकिन प्रदेश में पार्टी के जमीनी कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियान को लेकर उनके सवाल बने हुए हैं। उनकी ताजा टिप्पणी ने उत्तराखंड कांग्रेस में संगठन की सक्रियता और आगामी चुनावी तैयारियों को लेकर बहस को फिर सामने ला दिया है।
