GDP से आगे बढ़कर विकास मापने की नई पहल, UN Expert Group ने सुझाए 31 संकेतक

नई दिल्ली: पहली तिमाही के GDP आंकड़ों को लेकर जारी बहस के बीच विकास को सिर्फ GDP के आधार पर मापने की व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा गठित High-Level Expert Group on Beyond GDP ने आर्थिक विकास की तस्वीर को ज्यादा व्यापक तरीके से समझने के लिए 31 संकेतकों वाला एक नया डैशबोर्ड प्रस्तावित किया है।

इस रिपोर्ट का उद्देश्य GDP को खत्म करना नहीं, बल्कि किसी देश की वास्तविक प्रगति को समझने के लिए GDP के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों को भी मापना है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, GDP जरूरी है, लेकिन अकेले इससे यह पता नहीं चलता कि लोगों का जीवन वास्तव में बेहतर हो रहा है या नहीं।

GDP से आगे जाने की जरूरत क्यों महसूस हुई?

दशकों से किसी देश की आर्थिक प्रगति और विकास को मापने के लिए GDP को सबसे महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता रहा है। GDP बताता है कि किसी अर्थव्यवस्था में एक निश्चित अवधि के दौरान कितनी वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन हुआ।

लेकिन GDP में कई ऐसे पहलू सीधे तौर पर शामिल नहीं होते जो लोगों के जीवन की वास्तविक स्थिति बताते हैं। उदाहरण के लिए बेरोजगारी, आय और संपत्ति की असमानता, स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, पर्यावरण की स्थिति और सरकारी संस्थानों में लोगों का भरोसा।

UN Expert Group का कहना है कि GDP में वृद्धि के बावजूद दुनिया के कई हिस्सों में असमानता, पर्यावरणीय नुकसान और सार्वजनिक संस्थानों पर घटता भरोसा जैसी समस्याएं बनी रही हैं। इसलिए विकास को केवल आर्थिक उत्पादन की वृद्धि के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है।

31 संकेतकों का क्या मतलब है?

High-Level Expert Group on Beyond GDP ने 31 संकेतकों का एक डैशबोर्ड प्रस्तावित किया है। इसे चार प्रमुख हिस्सों में व्यवस्थित किया गया है।

  • पहला हिस्सा – Foundational Principles:
    इसमें शांति (Peace), मानवाधिकार (Human Rights) और पृथ्वी के प्रति सम्मान (Respect for the Planet) जैसे मूल सिद्धांत शामिल हैं।
  • दूसरा हिस्सा – Current Well-being:
    इसमें लोगों की मौजूदा जीवन-स्थिति को मापने पर जोर है। इसमें भौतिक परिस्थितियां और काम, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा, व्यक्तिगत कल्याण, सामाजिक एकजुटता, संस्थानों की गुणवत्ता और पर्यावरणीय गुणवत्ता जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
  • तीसरा हिस्सा – Equity and Inclusion:
    इसका फोकस यह देखने पर है कि विकास का लाभ समाज के अलग-अलग वर्गों तक समान रूप से पहुंच रहा है या नहीं। इसमें संपत्ति और आय की असमानता, गरीबी, काम में समावेशन और क्षेत्रीय असमानताओं जैसे पहलू शामिल हैं।
  • चौथा हिस्सा – Sustainability and Resilience:
    इसमें यह देखा जाएगा कि मौजूदा विकास भविष्य के लिए कितना टिकाऊ है और समाज आर्थिक, सामाजिक या पर्यावरणीय संकटों से निपटने में कितना सक्षम है। इसमें प्राकृतिक पूंजी, मानव पूंजी, सामाजिक पूंजी, संस्थागत पूंजी और उत्पादित पूंजी जैसे पहलू शामिल हैं।

रिपोर्ट किसने तैयार की?

High-Level Expert Group on Beyond GDP का गठन संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने मई 2025 में किया था। इस समूह की सह-अध्यक्षता Kaushik Basu, Cornell University में Carl Marks Professor of International Studies, और Nora Lustig, El Colegio de Mexico में Professor तथा Tulane University में Professor Emerita और Commitment to Equity Institute की Founding Director, ने की।

समूह ने मई 2026 में अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश की, जिसमें 31 संकेतकों वाले डैशबोर्ड के साथ आगे की व्यावहारिक कार्ययोजना भी सुझाई गई है। लगभग आधे संकेतक पहले से ही UN Sustainable Development Goals (SDGs) के संकेतकों से जुड़े हुए हैं।

भारत के लिए इसका क्या महत्व है?

भारत में भी GDP के आंकड़ों को लेकर हाल में चर्चा तेज हुई है। 31 अगस्त को जारी आधिकारिक GDP अनुमान में इस वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत बताई गई थी। इसके बाद आंकड़ों और नई base year revision प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे।

2 सितंबर को सरकार ने GDP आंकड़ों का बचाव करते हुए कहा था कि इसके लिए इस्तेमाल किए गए सभी डेटा स्रोत सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं।

भारत में आगे GDP की गणना को ज्यादा बेहतर बनाने के लिए base revision exercises को हर पांच साल में करने की दिशा में काम करने की बात कही गई है। इस बार COVID-19 महामारी के कारण base revision में देरी हुई थी।

इसके अलावा GDP के अनुमान में chain-based index mechanism की ओर बढ़ने की भी कोशिश हो रही है। इसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था में मांग और उत्पादन में होने वाले बदलावों को ज्यादा बेहतर तरीके से पकड़ना है।

क्या GDP को खत्म किया जाएगा?

नहीं। UN की पहल का मकसद GDP को हटाना नहीं है। प्रस्तावित व्यवस्था GDP को बनाए रखते हुए उसके साथ अन्य महत्वपूर्ण संकेतकों को जोड़ने की है, ताकि किसी देश की प्रगति की ज्यादा व्यापक तस्वीर सामने आ सके।

यानी भविष्य में किसी देश की सफलता का सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि उसकी GDP कितनी तेजी से बढ़ी, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि लोगों की आय, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, समानता, पर्यावरण और जीवन की गुणवत्ता में कितना सुधार हुआ।

अभी क्या स्थिति है?

Beyond GDP को लेकर फिलहाल अंतर-सरकारी स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है। भारत में आधिकारिक स्तर पर इस रिपोर्ट को संज्ञान में लिया गया है, लेकिन इसे लागू करने को लेकर अभी शुरुआती चरण है।

कुल मिलाकर, UN की यह पहल आर्थिक विकास को केवल उत्पादन और आय की वृद्धि से आगे ले जाकर लोगों और पर्यावरण के कल्याण, समानता, समावेशन और भविष्य की स्थिरता से जोड़ने की कोशिश है।

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