जात पात का भेद भाव भुला हर सनातनी को जोड़ रही श्रीनाथ जी की नाम यात्रा
प्रियतम के आने से पहले हर गली को उनके नाम से चहचहाना है
रामपुर। अधिक मास के पावन अवसर पर श्रीनाथ जी रसकथा महोत्सव के निमित्त निकाली जा रही प्रभात फेरी इन दिनों पूरे शहर में भक्ति, समरसता और सनातन एकता का संदेश दे रही है। प्रतिदिन प्रातः निकलने वाली यह निमंत्रण यात्रा केवल कथा का आमंत्रण नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ण, हर वर्ग और हर तबके को एक सूत्र में जोड़ने का माध्यम बनती जा रही है।
इस प्रभात फेरी की सबसे विशेष बात यह है कि इसमें जात-पात, ऊंच-नीच और भेदभाव का कोई स्थान नहीं है। यह यात्रा हर सनातनी को एक स्वर में पुकार रही है कि नाम अलग हो सकते हैं, स्वरूप अलग हो सकते हैं, लेकिन हर रूप में वही एक ईश्वर विराजमान हैं। यही भाव लोगों के हृदय को गहराई से स्पर्श कर रहा है।
बिना किसी शोर-शराबे, बिना डीजे, बिना भव्य रथ और सवारियों के निकलने वाली यह प्रभात फेरी अपनी सादगी और भक्ति भाव से लोगों के मन को मोह रही है। गली-गली में “जय जगन्नाथ, जय श्रीनाथ” के उद्घोष के साथ श्रद्धालु प्रभात फेरी का स्वागत कर रहे हैं। कहीं पुष्पवर्षा हो रही है तो कहीं लोग अपने घरों से बाहर निकलकर यात्रा में सम्मिलित हो रहे हैं।
गोवत्स महाराज जी द्वारा दिए गए चार प्रमुख सूत्र — गौ सेवा, प्रभात फेरी, युवा गोष्ठी और कथा वाचन — को यह प्रभात फेरी एक माला में पिरोने का कार्य कर रही है। आयोजकों का कहना है कि इन चारों सूत्रों के माध्यम से समाज में धर्म, सेवा और संस्कारों की अलख जगाई जा रही है।
प्रभात फेरी का मुख्य उद्देश्य श्रीनाथ जी के आगमन से पूर्व शहर की हर गली और हर घर तक नाम महिमा को पहुंचाना है। भक्तों के मन में यही भाव है कि “मेरे प्रियतम मेरे शहर में आने वाले हैं, उससे पहले मैं शहर की हर गली में जाकर उनके नाम की महिमा पहुंचाना चाहती हूं और हर मार्ग को भक्ति से चहचहाना चाहती हूं।”
इसी भावना के साथ श्रीनाथ जी रसकथा महोत्सव से पूर्व पूरे रामपुर में प्रभात फेरियों का क्रम जारी है, जो अब केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक जागरण का स्वरूप ले चुकी है।
प्रभात फेरी मे गीता गुप्ता, दीपा अग्रवाल, अंजू अग्रवाल, गीतिका, शिवानी, अंशिका अग्रवाल, सुनील राजपूत, वरुण जोशी, शुभम, चेतन, हर्षित रस्तोगी, योगेश गुप्ता, पंकज अग्रवाल, हर्षल सक्सेना, मून आदि लोग उपस्तिथ रहे।
