ज़ायरा जैसी बेटियाँ हैं समाज के लियें रौशनी – सैयद मोहतशम मुजतबा
हाई स्कूल में 89.3% अंक लाने वाली बेटी को समाजसेवी मोहतशम मुज्तबा ने घर जाकर किया सम्मानित
रामपुर: जिन घरों में सपनों से ज़्यादा ज़रूरतों की बात होती है, वहां से जब कोई बच्चा सफलता की ऊँचाइयों को छूता है, तो वो सिर्फ एक परीक्षा पास नहीं करता, बल्कि समाज की सोच बदल देता है। ऐसा ही एक उदाहरण बनी है एक ई रिक्शा चालक की बेटी ज़ायरा, जिसने तमाम मुश्किलों को पीछे छोड़ते हुए हाईस्कूल की परीक्षा में 89.99% अंक हासिल किए हैं।
इस उपलब्धि की खबर जब युवा समाजसेवी एवं छात्र नेता सैयद मोहतशम मुज्तबा को मिली, तो वे खुद उस बच्ची और उसके पिता से मिलने उनके घर पहुँचे। उन्होंने न केवल छात्रा को, बल्कि उसके पिता को भी माला पहनाकर सम्मानित किया और दोनों को ढेरों शुभकामनाएँ दीं।मोहतशम मुज्तबा ने कहा कि “इस बच्ची ने यह साबित कर दिया है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी सपना बड़ा नहीं होता।ज़ायरा ने साबित कर दिया है कि दृढ़ता और दृढ़ संकल्प ही सफलता की ओर ले जाते हैं तथा ज़ायरा ताशका एवं आस पास के इलाके की बेटियों के लियें एकप्रेरणा स्रोत का काम करेंगी। ज़ायरा समाज के लिए प्रेरणा है और हम सबका फर्ज़ है कि ऐसे होनहार बच्चों का सम्मान करें।” मोहतशम मुजतबा ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि यह आगे की प्रगतिशील यात्रा की शुरुआत मात्र है।
इस सम्मान के दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया। बच्ची के पिता गुड्डु साहब की आँखों में खुशी और गर्व के आँसू थे।
छात्रा का सपना है कि वह आगे चलकर अफसर बने और अपने पिता की मेहनत का सच्चा फल उन्हें दे सके। वह कहती है कि, “मेरे पापा ने हमेशा मेरा साथ दिया है,मैं अपनी पढ़ाई से उनका सिर हमेशा ऊँचा रखना चाहती हूँ।
मोतशम मुजतबा का कहना है कि यह कहानी बताती है कि ज़मीन चाहे जैसी भी हो, अगर बीज सही है और सींचने वाला ईमानदार है, तो फसल ज़रूर लहराएगी। इस मौके पर गुड्डु साहब, मोहसिन जावेद कासमी, हकीम इकरार साहब, मोहम्मद् उमर समेत आदि मौजूद रहे।
