जंडियाला हलके में ब्लॉक तरसिक्का तोड़ने पर कांग्रेस पार्टी का रोष, पूर्व कांग्रेस विधायक सुखविंदर सिंह डेनी बंडाला के नेतृत्व में विशाल प्रदर्शन

पंजाब सरकार और स्थानीय मंत्री पर गंभीर आरोप, 65 पंचायतों के लोगों में दिखी भारी नाराज़गीकांग्रेस की चेतावनी – ब्लॉक बहाल न हुआ तो प्रदर्शन होंगे और तेज़, गरीब व दलित समुदाय की चुनी हुई महिला पंचायती सदस्यों को सस्पेंड करने पर उठे सवाल

अमृतसर के जंडियाला गुरु हलके से पूर्व कांग्रेस विधायक और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सचिव सुखविंदर सिंह डेनी बंडाला ने पंजाब सरकार के हालिया फैसले के विरोध में विशाल रोष प्रदर्शन किया। डेनी बंडाला ने मीडिया से बातचीत में बताया कि हाल ही में पंजाब कैबिनेट द्वारा ब्लॉक तरसिक्का को तोड़ने का फैसला लिया गया है, जिसके कारण हलके के लोग बड़े पैमाने पर परेशान हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस फैसले से तरसिक्का और महिते क्षेत्र की कुल 65 पंचायतों को जंडियाला ब्लॉक के साथ जोड़ दिया गया है, जिससे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। डेनी बंडाला ने आरोप लगाया कि वर्तमान मंत्री, जो इसी हलके के विधायक भी हैं, ने कैबिनेट मीटिंग में इस फैसले का विरोध नहीं किया।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर ब्लॉक तरसिक्का को दोबारा बहाल नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन और तीखे किए जाएंगे। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि अगर 2027 में कांग्रेस की सरकार बनी तो इस नोटिफिकेशन को रद्द कर ब्लॉक तरसिक्का को फिर से बहाल किया जाएगा।

प्रदर्शन के दौरान डेनी बंडाला ने मौजूदा सरकार पर सत्ता के अहंकार का आरोप लगाया और कहा कि लोगों की भावनाओं को दरकिनार कर यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से गांवों की ज़रूरी सेवाओं में रुकावट आ रही है और लोगों को अपने काम के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।

पूर्व विधायक ने गरीब और दलित समुदाय की तीन चुनी हुई महिला पंचायती सदस्यों को सस्पेंड करने के फैसले को भी गलत ठहराया। उन्होंने कहा कि यह गरीब वर्ग के साथ भेदभाव है और लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने की कोशिश है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस अन्याय का जवाब जनता 2027 के चुनाव में ज़रूर देगी।

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, विभिन्न पार्टियों के कार्यकर्ता और महिलाएं शामिल हुईं। लोगों ने पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी की और मांग की कि ब्लॉक तरसिक्का को तुरंत बहाल किया जाए तथा चुनी हुई महिला सदस्यों को उनके पद पर पुनः स्थापित किया जाए ताकि लोकतंत्र की रक्षा हो सके।

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