कृषि विभाग द्वारा संचारी रोग नियंत्रण अभियान चालाया गया

रामपुर। विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान 1 जुलाई से 31जुलाई 2024 तक एवं दस्तक अभियान के रूप में 11 जुलाई से 31 जुलाई 2024 के अन्तर्गत कृषि विभाग द्वारा जनसहभागिता के माध्यम से क्षेत्रीय कर्मचारियों एवं जनसामान्य के सहयोग को लेकर प्रचार-प्रसार और उससे होने वाली बीमारियों एवं मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव एवं खेतों में कृतक नियंत्रण के प्रभावी एवं सुरक्षित उपायों से जनसमुदायों को अवगत कराते हुए आवासीय घरों एवं उनके आस-पास चूहा एवं छछूंदर नियंत्रण जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। चूंकि संचारी रोगों के प्रसार के लिए अन्य कारकों के साथ-साथ चूहा एवं छछूंदर भी उत्तरदायी है। चूहा एवं छछूंदर से जानलेवा बीमारी स्क्रवटाइफस एवं लेप्टोस्पायरोसिस फैलती है। स्क्रवटाइफस चूहे छछून्दर के बालो में मौजूद पिस्सू (माइट) के काटने से रकब टाइफस बैक्टिरिया मनुष्य के शरीर में पहुच जाता है जिससे तेज बुखार सिर दर्द, आखों में संक्रमण मांसपेशियों में तेज दर्द एवं त्वचा पे चकत्ते पड़ जाते है।
लेप्टोस्पायरोसिस इसे रैंट फीवर भी कहा जाता है यह चूहे छछून्दर के मल-मूत्र में पाये जाने वाले बैक्टिरिया के सम्पर्क में आने से होती है, इसके लक्षण में तेज बुखार, तीव्र सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द तथा त्वचा व आंखे लाल पड़ जाना है, बीमारी की गम्भीर स्थिति में मेनिन्जाइटिस, गुर्दे की विफलता तथा फेफड़ों में रक्ततनाव हो जाता है और यह बिमारी महामारी का रूप ले सकता है। इन रोगों की रोकथाम के लिए चूहा एवं छछूंदर का रोकथाम जरूरी है। कृषि विभाग द्वारा 689 जागरूकता गोष्ठियां प्रस्तावित की गई है 03 जुलाई से 31 जुलाई तक आयोजित की जायेगी।
कृषक विभिन्न उपायों को अपनाकर संचारी रोग नियंत्रण कर सकते है। चूहे दो प्रकार के होते है-घरेलू एवं खेत के चूहे घरेलू चूहा घर में पाया जाता है जिसे चुहिया या मूषक कहा जाता है। खेत के चूहे में फील्ड रैट, सॉफ्ट फर्ड फील्ड रेट एवं फील्ड माउस प्रमुख है। इसके अतिरिक्त भूरा चूहा खेत व झार दोनों जगह पर पाया जाता है जबकि जंगली चूहा जंगलों या रेगिस्तानों एवं निर्जन झाडियों में पाया जाता है।
चूहों की संख्या को नियंत्रण करने के लिए अन्न भंडारण पक्का, कंकरीट तथा धातु से बने होने चाहिए, ताकि उनको भोज्य पदार्थ सुगमता से न उपलब्ध हो सके। चूहा अपना बिल झाडियों एवं कूडों एवं मेडों आदि पर बनाते है। खेतों की समय-समय पर साफ-सफाई करके संख्या को नियंत्रण किया जा सकता है। चूहों के प्राकृतिक शत्रुओं जैसे-बिल्ली, सांप, लोमडी, बाज व चमगादड आदि द्वारा भोजन के रूप में प्रयोग किया जाता है। इनको संरक्षण देने से चूहों की संख्या नियंत्रण की जा सकती है। चूहेदानी का प्रयोग करके उसमें आकर्षण चारा जैसे रोटी डबल रोटी बिस्कुट आदि रखकर चूहों को फसाकर मारने से इनकी संख्या का नियंत्रण किया जा सकता है। घरों में ब्रोमाडियोलॉन 0.005 प्रति0 के बने चारे में 10 ग्राम दवा प्रत्येक जिदा बिल में रखने से चूहे उसको खाकर मर जाते है। एल्युमीनियम फास्फाइड नामक दवा की 3-4 ग्राम मात्रा प्रति जिन्दा बिल में डालकर बिल बंदकर देने से उसमें से निकलने वाली फास्फीन गैस से चूहे मर जाते है।

 

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