Body Language Tips: बात करते समय आंखों में आंखें डालकर क्यों नहीं देख पाते कुछ लोग? जानिए इसके पीछे की मनोवैज्ञानिक वजह

नई दिल्ली: किसी भी बातचीत में आई कॉन्टैक्ट (Eye Contact) आत्मविश्वास, ईमानदारी और बेहतर संवाद का संकेत माना जाता है। हालांकि, कई लोग बात करते समय सामने वाले की आंखों में देखकर बात नहीं कर पाते। इसका मतलब हमेशा यह नहीं होता कि व्यक्ति झूठ बोल रहा है या कुछ छिपा रहा है।

झिझक और आत्मविश्वास की कमी हो सकती है कारण

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, कुछ लोगों में आत्मविश्वास की कमी या सामाजिक झिझक (Social Anxiety) होने के कारण वे बातचीत के दौरान आंखों में आंखें डालकर बात करने से बचते हैं। ऐसे लोग असहज महसूस करते हैं और नजरें इधर-उधर करने लगते हैं।

शर्मीला स्वभाव भी हो सकता है वजह

कुछ लोगों का स्वभाव जन्म से ही शर्मीला होता है। ऐसे लोग नए लोगों से बातचीत करते समय या औपचारिक माहौल में सीधे आई कॉन्टैक्ट बनाने में सहज महसूस नहीं करते। यह उनकी व्यक्तित्व की विशेषता हो सकती है।

अधिक सोचने की आदत भी करती है प्रभावित

जो लोग बातचीत के दौरान हर शब्द और प्रतिक्रिया के बारे में अधिक सोचते हैं, वे भी अक्सर आंखों में देखकर बात नहीं कर पाते। उनका ध्यान सामने वाले की आंखों के बजाय अपने विचारों पर अधिक केंद्रित रहता है।

हर बार नजरें चुराना झूठ बोलने का संकेत नहीं

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल आंखों में देखकर बात न करना इस बात का प्रमाण नहीं है कि व्यक्ति झूठ बोल रहा है। इसके पीछे तनाव, घबराहट, मानसिक दबाव, शर्मीलापन या अन्य मनोवैज्ञानिक कारण भी हो सकते हैं। इसलिए केवल आई कॉन्टैक्ट के आधार पर किसी के व्यक्तित्व या इरादों का आकलन करना सही नहीं माना जाता।

कैसे बढ़ाएं बेहतर आई कॉन्टैक्ट?

यदि बातचीत के दौरान आई कॉन्टैक्ट बनाने में कठिनाई होती है, तो नियमित अभ्यास से इसमें सुधार किया जा सकता है। सामने वाले के चेहरे की ओर ध्यान देना, आत्मविश्वास बढ़ाना, शांत रहकर संवाद करना और सामाजिक परिस्थितियों में धीरे-धीरे सहज होना इस आदत को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

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