- प्रतीक वार्ष्णेय की रिपोर्ट
हाथरस, 7 जुलाई 2025 — शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। बीएसए कार्यालय हाथरस से जुड़ी एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि नियुक्ति और तबादले की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
मामला वर्ष 2016 का है, जब प्राथमिक विद्यालय विघेपुर में गौरव शर्मा नामक शिक्षक की नियुक्ति हुई थी। हैरान कर देने वाली बात यह है कि सिर्फ 13 दिन बाद ही उनका तबादला प्राथमिक विद्यालय नगला खरग कर दिया गया, जबकि शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार प्रोबेशन पीरियड (परिवीक्षा काल) के दौरान एक वर्ष की सेवा से पहले तबादला नहीं किया जा सकता।
उठते हैं कई गंभीर सवाल:
आखिर किसके आदेश पर हुआ यह तबादला?
क्या इसमें किसी उच्चाधिकारी की मिलीभगत थी?
क्या यह मामला किसी चहेते को फायदा पहुंचाने का है?
शिक्षा विभाग के सूत्रों की मानें तो तबादले की फाइल में कई दस्तावेज संदिग्ध पाए गए हैं, जिनकी अब सघन जांच की मांग की जा रही है।
क्या जवाब देगा बीएसए कार्यालय?
बीएसए कार्यालय की भूमिका पर अब प्रत्यक्ष रूप से सवाल उठने लगे हैं। यदि समय रहते इस मामले की जांच नहीं हुई, तो यह एक बड़ा प्रशासनिक घोटाला बन सकता है। विभागीय जवाबदेही तय करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग लगातार तेज हो रही है।
शिक्षा विभाग की साख और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए इस मामले में तत्काल जांच और ठोस कार्रवाई जरूरी है, वरना भविष्य में इस तरह की लापरवाहियां व्यवस्था पर भारी पड़ सकती हैं।
