- रिपोर्ट- मनोज कुमार यादव
एटा:- विमानन जगत के विस्तृत आयामों को बौद्धिक दृष्टि से समेटने का अद्वितीय प्रयास एस.के. मोहनिका, डीआईजी, सीआईएसएफ द्वारा रचित पुस्तक “Above and Beyond – Exploring the Amazing World of Aviation” के रूप में मूर्त रूप ले चुका है। इस बहुप्रतीक्षित ग्रंथ का लोकार्पण 07 अक्टूबर 2025 को माननीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री राम मोहन नायडू द्वारा इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में संपन्न हुआ — यह न केवल एक साहित्यिक क्षण था, बल्कि विमानन बौद्धिकता के क्षेत्र में एक मील का पत्थर भी।
यह ग्रंथ विमानन उद्योग की जटिलताओं, उसकी तकनीकी परतों, परिचालन पद्धतियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के गहन विश्लेषण का एक उत्कृष्ट संकलन है। एस.के. मोहनिका ने अपनी गहन अनुभवजन्य दृष्टि और संरचनात्मक समझ के माध्यम से इस क्षेत्र के सूक्ष्मतम पहलुओं को न केवल उजागर किया है, बल्कि उन्हें एक सुसंगत और ज्ञानवर्धक रूप में प्रस्तुत भी किया है। यह पुस्तक पाठक को विमानों की उड़ान-तकनीक से लेकर हवाई अड्डों की संचालन प्रणाली, सुरक्षा तंत्र, हवाई यातायात प्रबंधन, आपातकालीन प्रत्युत्तर और विमानन मनोविज्ञान तक की व्यापक यात्रा पर ले जाती है।
इस पुस्तक का विशेष महत्व इस तथ्य में निहित है कि यह केवल विमानन पेशेवरों के लिए ही नहीं, बल्कि उन सभी जिज्ञासु मस्तिष्कों के लिए भी अमूल्य है जो आसमान में फैले इस जटिल नेटवर्क के रहस्यों को समझने का उत्साह रखते हैं। लेखक ने विमानों की उड़ान को केवल एक यांत्रिक घटना के रूप में नहीं, बल्कि मानवीय सृजनशीलता, अनुशासन, जोखिम प्रबंधन और तकनीकी उत्कृष्टता के सम्मिलित प्रतिरूप के रूप में प्रस्तुत किया है।
पुस्तक में प्रयुक्त भाषा सशक्त, गूढ़ और विश्लेषणात्मक है, जो पाठक को विचारोत्तेजक विमर्श की दिशा में अग्रसर करती है। यह केवल तथ्यों का संकलन नहीं, बल्कि एक विचार यात्रा है जो पाठक को “ऊंचाई” के प्रतीकात्मक अर्थ को समझने के लिए प्रेरित करती है—जहां उड़ान केवल आकाश में नहीं, बल्कि ज्ञान, दक्षता और आत्मविश्वास के विस्तार में भी होती है।
निस्संदेह, “Above and Beyond” विमानन क्षेत्र की व्यावसायिक परिपक्वता, बौद्धिक गहराई और प्रौद्योगिकीय उत्कर्ष का सजीव दस्तावेज है। यह ग्रंथ आने वाली पीढ़ियों के लिए न केवल प्रेरणा का स्रोत बनेगा, बल्कि भारत के बढ़ते विमानन परिदृश्य को वैचारिक दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक भी सिद्ध होगा। यह पुस्तक सिद्ध करती है कि ज्ञान की उड़ान, आकाश की ऊंचाइयों से भी कहीं ऊपर होती है ।
