Baisakhi 2024: देश भर में मनाई जा रही बैसाखी, जानें इस दिन क्यों खाया जाता है सत्तू

सूर्य के मेष राशि में आने पर सत्तू और गुड़ खाना चाहिए और करना चाहिए दान

नई दिल्ली। बैसाखी पंजाबी समुदाय का त्योहार है। बैसाखी पर्व को हिन्दु सौर कैलेंडर पर आधारित, सिख नव वर्ष के रूप में भी मनाया जाता है। बैसाखी के दिन किसान अनाज की पूजा करते हैं और फसल के कटकर घर आ जाने की खुशी में भगवान और प्रकृति का आभार प्रकट करते हैं.। इसी दिन खालसा पन्थ की स्थापना भी हुई थी।
कहते हैं कि वैशाख में श्रीहरि की उपासना करने वालों को अक्षय फल की प्राप्ति होती है।अक्षय यानी कभी न खत्म होने वाला पुण्य। इस महीने में अक्षय तृतीया, वरुथिनी एकादशी, बुद्ध पूर्णिमा सहित कई बड़े व्रत और त्योहार आते हैं लेकिन इस साल वैशाख में एक दिन ऐसा है जो बहुत खास माना जा रहा है। वह तारीख है 14 अप्रैल..

13 अप्रैल 2023 के दिन क्या है खास ?
13 अप्रैल 2023 को मेष संक्रांति, बैसाखी, बाबा साहेब आंबेडकर जयंती, बिहू, खरमास की समाप्ति है. एक ही दिन कई शुभ योग का संयोग बनने से ये दिन बहुत ही शुभ माना जा रहा है। सूर्य और विष्णु जी की पूजा-पाठ करने से इस दिन सुख-धन में वृद्धि होगी। इस दिन से मांगलिक कार्यों की शुरुआत भी हो जाएगी।

सत्तू का धार्मिक महत्व
बैसाखी पर बिहार सहित कई क्षेत्रों में सत्तू खाने और दान करने की परंपरा रही है। ज्योतिषीय के अनुसार चने की सत्तू का संबंध सूर्य, मंगल और गुरु से भी माना जाता है। इसलिए कहते हैं कि, सूर्य के मेष राशि में आने पर सत्तू और गुड़ खाना चाहिए और इनका दान भी करना चाहिए। जो इस दिन सत्तू खाते हैं और इनका दान करते हैं वह सूर्य कृपा का लाभ पाते हैं। मृत्यु के बाद इन्हें उत्तम लोक में स्थान मिलता है और फिर नया जन्म लेने पर गरीबी का मुंह नहीं देखना पड़ता है। सत्तू का दान करने मात्र से सूर्य, शनि, मंगल और गुरु इन चारों ग्रहों की प्रसन्नता प्राप्त हो जाती है।

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