Azam Khan’s political influence: आजम खां के राजनीतिक प्रभाव पर इरशाद महमूद ने उठाए सवाल, बोले- 15 नहीं 50 नामों पर भी गंभीरता से सुनी जानी चाहिए राय

Azam Khan’s political influence : समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां के राजनीतिक प्रभाव और पार्टी में उनकी राय को दिए जा रहे महत्व को लेकर रामपुर में चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच इरशाद महमूद ने कहा है कि आजम खां जैसे वरिष्ठ नेता की राजनीतिक राय को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

इरशाद महमूद ने स्पष्ट किया कि वह न तो समाजवादी पार्टी में हैं और न ही आजम खां के साथ हैं। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि जब आजम खां के करीब रहने वाले लोग इस मुद्दे पर कुछ नहीं कह रहे हैं, तो उन्हें अपनी बात सामने रखना जरूरी लगा।

आजम खां के परिवार को सफाई देने की जरूरत क्यों पड़ी?

इरशाद महमूद ने आजम खां के करीब पांच दशक लंबे राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने आजम खां को अपने राजनीतिक फैसलों या प्रभाव को लेकर सफाई देते हुए कम ही देखा है। उनके मुताबिक, आजम खां का राजनीतिक अंदाज हमेशा स्पष्ट और खुला रहा है।

उन्होंने कहा कि अब पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि आजम खां के परिवार की ओर से भी सफाई देनी पड़ रही है। उनके मुताबिक, मुद्दा सिर्फ 15 टिकटों का नहीं है, बल्कि सवाल यह है कि दशकों तक पार्टी में सक्रिय रहे एक वरिष्ठ नेता की राजनीतिक राय को कितना महत्व दिया जा रहा है।

15 उम्मीदवारों के नाम सुझाए जाने की चर्चा

हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, आजम खां ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने 15 नाम सुझाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ये नाम रामपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आसपास की विधानसभा सीटों से जुड़े बताए जा रहे हैं।

इसी संदर्भ में इरशाद महमूद ने कहा कि यदि आजम खां की राय ली जा रही है तो इसे केवल 15 नामों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक अनुभव को देखते हुए 50 उम्मीदवारों के बारे में भी उनकी राय को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

2019 और विधान परिषद चुनाव का दिया उदाहरण

इरशाद महमूद ने अपने बयान में वर्ष 2019 का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय मुरादाबाद से हाजी नासिर कुरैशी के नाम वापस लेने के बाद डॉ. एसटी हसन को समाजवादी पार्टी का उम्मीदवार बनाया गया था।

उन्होंने सरफराज खान के बेटे शाहनवाज खान का भी जिक्र किया और कहा कि उन्हें विधान परिषद चुनाव में सपा का उम्मीदवार बनाया गया था। उस समय शाहनवाज खान को आजम खां के करीबी के तौर पर देखा जाता था।

‘किसी नेता की हर बात मानना जरूरी नहीं’

इरशाद महमूद ने कहा कि राजनीति में किसी एक नेता की हर राय को मानना जरूरी नहीं होता। हालांकि, उनके मुताबिक, जिस नेता ने दशकों तक पार्टी के लिए काम किया हो, उसकी राय को कितना महत्व दिया जा रहा है, यह सवाल उठना स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा चर्चा को केवल टिकटों के बंटवारे तक सीमित करके देखने के बजाय इसे आजम खां के राजनीतिक प्रभाव और समाजवादी पार्टी में उनकी वर्तमान भूमिका के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए।

About The Author

Leave A Reply

Your email address will not be published.