नई दिल्ली। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी कहा जाता है। यह दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास होता है। गणेश चतुर्थी पर घर-घर स्थापित किए गए गणपति बप्पा का विसर्जन इसी दिन विधि-विधान से किया जाता है। साथ ही मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में करवट बदलते हैं, इसलिए उनकी उपासना करने से जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं।
इस वर्ष अनंत चतुर्दशी 6 सितंबर 2025 (शनिवार) को मनाई जाएगी। इस दिन अनंत सूत्र धारण करने और गणपति विसर्जन का विशेष महत्व रहेगा।
अनंत सूत्र का महत्व
अनंत चतुर्दशी के दिन हाथ में 14 गांठ वाला धागा बांधा जाता है, जिसे अनंत सूत्र कहा जाता है। यह धागा सूती या रेशम का होता है। माना जाता है कि इन 14 गांठों से चौदह लोकों का प्रतीक जुड़ा है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति चौदह वर्षों तक नियमपूर्वक इस व्रत को करता है और अनंत सूत्र धारण करता है, उसे विष्णु लोक की प्राप्ति होती है।
क्यों बांधा जाता है 14 गांठ वाला सूत्र?
पौराणिक कथा के अनुसार, जब पाण्डव जुए में सब कुछ हारकर वनवास का कष्ट झेल रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी। धर्मराज युधिष्ठिर ने भाइयों और द्रौपदी संग यह व्रत किया और अनंत सूत्र धारण किया। इसके प्रभाव से पाण्डव अपने संकटों से मुक्त हो गए।
अनंत सूत्र बांधने के नियम
यह डोर केवल सूती या रेशम की होती है।
पुरुष इसे दाहिने हाथ पर बांधते हैं, जबकि महिलाएं बाएं हाथ पर।
सूत्र को केवल पूजा के बाद ही बांधा जाता है।
इसे कम से कम 14 दिनों तक हाथ में रखना चाहिए।
14 दिन बाद इसे उतारकर पूजा स्थल पर रख देना चाहिए।
अनंत चतुर्दशी का यह व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास को भी मजबूत करता है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक परंपराओं पर आधारित हैं। इसकी khabrejunction.com नहीं करता। किसी भी निर्णय से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
