इंडिगो संकट के बीच उभरे युवा नेता: नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू पर टिकी देश की नज़र

इंडिगो की बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने से पैदा हुए उड्डयन संकट ने केंद्र सरकार के सबसे युवा मंत्री राम मोहन नायडू को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। नए नागरिक उड्डयन मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभालने के महज एक साल के भीतर ही यह संकट उनके लिए पहली बड़ी परीक्षा बनकर सामने आया है। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए वे लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने दिल्ली में इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स से मुलाकात कर हालात सामान्य करने की तैयारियों पर चर्चा की।

हाइलाइट्स

इंडिगो फ्लाइट कैंसिलेशन संकट ने राम मोहन नायडू को सुर्खियों में ला दिया।

27 साल की उम्र में सांसद बने और आज मोदी सरकार के सबसे युवा मंत्री हैं।

युवाओं के लिए ‘पॉलिटिक्स फॉर इम्पैक्ट’ इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किया।

महिलाओं के अधिकार, पितृत्व अवकाश और सैनिटरी पैड पर GST छूट जैसे मुद्दों पर संसद में मुखर रहे।

पिता की विरासत से राजनीतिक शुरुआत

आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम से लोकसभा सांसद राम मोहन नायडू का राजनीतिक सफर 2012 में पिता एवं पूर्व सांसद के. येर्रन नायडू के निधन के बाद शुरू हुआ। 2014 में वे 27 वर्ष की उम्र में पहली बार सांसद चुने गए और तब से लगातार तीन बार जीत दर्ज कर चुके हैं। 2019 में जब वाईएसआर कांग्रेस ने राज्य की 25 में से 23 सीटों पर विजय हासिल की, तब भी उनकी जीत टीडीपी के लिए बड़ी राहत साबित हुई थी।

चंद्रबाबू नायडू के विश्वसनीय सहयोगी

टीडीपी में उन्हें मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का दिल्ली में सबसे भरोसेमंद चेहरा माना जाता है। संसद में कौन-से मुद्दे उठाने हैं और केंद्र से जुड़े मामलों पर किन मंत्रालयों से संवाद करना है—इन सभी रणनीतियों में उनकी अहम भूमिका रहती है। उनके चाचा क. अच्चन्नायडू आंध्र प्रदेश सरकार में मंत्री हैं, जिससे उनकी राजनीतिक पकड़ और मजबूत होती है।

महिलाओं के अधिकारों पर मुखर और प्रगतिशील आवाज

राम मोहन नायडू हमेशा से संसद में सक्रिय रहे हैं।

पितृत्व अवकाश लेने का उनका निर्णय लैंगिक समानता पर राष्ट्रीय बहस की वजह बना।

वे मासिक धर्म स्वच्छता, सेक्स एजुकेशन और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर स्पष्ट और प्रगतिशील सोच रखते हैं।

हैदराबाद की दिशा कांड पर उनका भाषण देशभर में सराहा गया, यहां तक कि सोनिया गांधी ने भी उनकी तार्किक दलीलों की प्रशंसा की थी।

उड्डयन मंत्रालय में पहला बड़ा टेस्ट

नागरिक उड्डयन मंत्री बनने के बाद अहमदाबाद एयर इंडिया हादसा हो या इंडिगो विमानों का संकट—हर स्थिति में उन्होंने तेज़ी से नेतृत्व दिखाया है। इंडिगो के मामले पर उन्होंने संसद में स्पष्ट किया कि यह समस्या किसी नियामकीय बदलाव के कारण नहीं, बल्कि क्रू प्लानिंग और रोस्टरिंग की गड़बड़ी से उत्पन्न हुई है।

अब देश की निगाहें इस युवा मंत्री पर टिकी हैं कि वे इस उड्डयन संकट को कितनी कुशलता से संभालते हैं और क्या वे नई नीतियों एवं सुधारों के साथ विमानन क्षेत्र में स्थिरता ला पाते हैं।

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