टीकाकरण महोत्सव के दौरान औचक निरीक्षण में उजागर हुई प्रशासनिक शिथिलता, 83 प्रतिशत स्वास्थ्य उपकेंद्र बंद

एटा:- टीकाकरण महोत्सव के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत का आकलन करने हेतु उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री फेलो द्वारा विकास खण्ड सकीट के विभिन्न स्वास्थ्य उपकेंद्रों का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान सामने आए तथ्यों ने प्रशासनिक उदासीनता एवं स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली की नकारात्मक छवि को स्पष्ट रूप से उजागर किया। निरीक्षण में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि कुल निरीक्षित उपकेंद्रों में से लगभग 83 प्रतिशत स्वास्थ्य उपकेंद्र बंद पाए गए।

स्वास्थ्य विभाग, विकास खण्ड सकीट की लगातार गिरती रैंकिंग को दृष्टिगत रखते हुए किए गए इस निरीक्षण की शुरुआत रेवाड़ी उपकेंद्र से की गई, जो निरीक्षण के समय बंद पाया गया। इसके उपरांत संबंधित मंसूरनगर टीकाकरण सत्र का निरीक्षण किया गया, जहाँ आईपीवी वैक्सीन उपलब्ध नहीं पाई गई। मौके पर यह भी पाया गया कि आशा की डायरी अपूर्ण थी। गाँव भ्रमण के दौरान धात्री महिलाओं एवं उनके परिजनों से संवाद करने पर यह शिकायत सामने आई कि आंगनवाड़ी कार्यकत्री द्वारा शिशुओं एवं बच्चों को पुष्टाहार का वितरण नहीं किया जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि टीकाकरण सत्रों में बच्चों एवं महिलाओं की लंबाई और वजन का मापन नहीं किया जा रहा, जिस पर मुख्यमंत्री फेलो द्वारा गहरी नाराजगी व्यक्त की गई। बच्चों के वजन मापन हेतु डिजिटल मशीन के स्थान पर सामान्य एवं खराब मशीन का उपयोग किया जा रहा था, जिसमें लगभग 20 किलोग्राम तक की त्रुटि पाई गई। यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही एवं आंकड़ों की अविश्वसनीयता को दर्शाती है।

इसके पश्चात लोथरा उपकेंद्र का निरीक्षण किया गया, जो पूर्व की भांति इस बार भी बंद पाया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि उक्त उपकेंद्र के संबंध में पूर्व में की गई शिकायतों एवं निरीक्षणों का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। वहीं फफोतू उपकेंद्र खुला पाया गया, जहाँ मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की जा रही थीं, परंतु संबंधित सुन्दरपुर टीकाकरण सत्र को निर्धारित समय से पूर्व ही बंद कर दिया गया, जो टीकाकरण महोत्सव की मूल भावना के प्रतिकूल है।

अंतिम चरण में नगला भजुआ उपकेंद्र का निरीक्षण किया गया, जो पूर्व की भांति इस बार भी बंद पाया गया। यह उपकेंद्र पिछले कई महीनों से लगातार बंद पाया जा रहा है, जिसकी शिकायतें जनता एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा अनेक बार दर्ज कराई जा चुकी हैं, इसके बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। निरीक्षण के दौरान बंद उपकेंद्रों के बाहर शराब के पाउच पाए गए, जिससे यह प्रतीत होता है कि उपकेंद्रों के बंद रहने के कारण न तो नियमित साफ-सफाई हो रही है और न ही परिसर की समुचित निगरानी की जा रही है।

निरीक्षण के दौरान सामने आई इन गंभीर अनियमितताओं से यह स्पष्ट है कि प्रशासनिक नियंत्रण की कमी एवं स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण जनस्वास्थ्य योजनाओं का अपेक्षित लाभ आम जनता तक नहीं पहुँच पा रहा है। मुख्यमंत्री फेलो द्वारा अवगत कराया गया कि इस संबंध में उत्तर प्रदेश शासन को विस्तृत रिपोर्ट प्रेषित की जाएगी, जिससे माननीय मुख्यमंत्री जी की मंशा के अनुरूप सभी बच्चों, महिलाओं एवं आम नागरिकों को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित की जा सकें।

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