वन अधिकार अधिनियम की धज्जियां उड़ाने का आरोप, गरीब आदिवासियों की लहलहाती फसल नष्ट, फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी

  • रिपोर्ट: मंजय वर्मा

मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जनपद अंतर्गत लालगंज कोतवाली क्षेत्र की पुलिस चौकी लहंगपुर के ग्राम पंचायत तेंदुआ खुर्द में वन विभाग पर गंभीर आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वन अधिकार अधिनियम की खुलेआम अनदेखी करते हुए वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने 18 दिसंबर 2025 को जेसीबी मशीन से गरीब भूमिहीन आदिवासियों द्वारा बोई गई गेहूं और सरसों की लहलहाती फसल को बेरहमी से रौंदकर नष्ट कर दिया।

ग्रामीणों के अनुसार, जिन जमीनों पर कार्रवाई की गई, वहां वे तीन से चार पीढ़ियों से निवास कर जीवन-यापन कर रहे हैं। आदिवासियों का कहना है कि उनके पूर्वजों ने इसी जमीन की रक्षा करते हुए अपना जीवन बिताया और आज भी उनका पूरा परिवार इसी भूमि पर निर्भर है। आरोप है कि फसल नष्ट करने के साथ-साथ वन विभाग द्वारा गड्ढे खोदने का कार्य भी किया जा रहा था।

पीड़ित ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने अधिकारियों से हाथ जोड़कर अपनी आजीविका और परिवार के भरण-पोषण की दुहाई दी, लेकिन किसी प्रकार की संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग जंगलों की रक्षा करने में विफल रहा है, लेकिन बसा-बसाया गांव, घर और गरीबों की फसल उजाड़ने में पूरी सख्ती दिखा रहा है।

गांव वालों ने यह भी आरोप लगाया कि वन विभाग द्वारा उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी दी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वन दरोगा दशमी यादव द्वारा झूठे दस्तावेज तैयार कर यह दर्शाया गया कि वर्ष 2021 में यह भूमि वन विभाग की थी और ग्रामीणों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया। साथ ही जंगली जानवरों की तस्करी जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं, जिन्हें ग्रामीण पूरी तरह बेबुनियाद बता रहे हैं।

आदिवासियों का आरोप है कि वन दरोगा द्वारा पहले गांव में आकर पैसे की मांग की जाती थी, लेकिन गरीब होने के कारण जब वे रकम नहीं दे पाए तो उन्हें लगातार धमकाया गया और बाद में फर्जी मुकदमे में फंसा दिया गया। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि वे पढ़े-लिखे नहीं हैं और कथित तौर पर उनसे बहला-फुसलाकर अंगूठा निशान और हस्ताक्षर करवा लिए गए।

मीडिया से बातचीत में ग्रामीणों ने बताया कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा माले) की जिला सचिव जिरा भारती एवं अमरेश भारती मौके पर पहुंचे और वन विभाग की कार्रवाई का विरोध किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि फसल नष्ट करने का काम नहीं रोका गया तो गरीब आदिवासी भूख हड़ताल करने को मजबूर होंगे। इसके बाद तहसीलदार लालगंज के हस्तक्षेप से कार्य को अस्थायी रूप से रुकवाया गया।

ग्रामीणों और आदिवासियों ने उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाते हुए मांग की है कि उन्हें वन अधिकार अधिनियम के तहत उनका हक दिया जाए और उनकी जमीन, घर व आजीविका के साधनों को उनसे न छीना जाए। उनका कहना है कि यदि गांव उजाड़ दिया गया तो कड़ाके की ठंड में वे अपने परिवारों के साथ कहां जाएंगे और जीवन यापन कैसे करेंगे।

Leave A Reply

Your email address will not be published.