- रिपोर्ट: सरफ़राज़ आलम
लखीसराय: जिला पदाधिकारी,लखीसराय के पत्रांक 2584/गो०, दिनांक 12.06.2026 के आलोक में कुलपति, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर (भागलपुर) को समर्पित पत्र के अनुपालन में लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा एवं चानन प्रखंड अंतर्गत अनुसूचित जनजातीय टोलों में कृषि आधारित आजीविका को सुदृढ़ करने तथा किसान परिवारों की आय में वृद्धि हेतु उच्च मूल्य वाली फसलों एवं औषधीय-सुगंधित फसलों की खेती को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से तकनीकी सर्वेक्षण एवं अध्ययन किया जा रहा है।
इसी क्रम में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के स्तर से गठित 4 सदस्यीय वैज्ञानिकों/अधिकारियों डॉ. शिवनाथ दास (क्षेत्रीय निदेशक, कृषि अनुसंधान संस्थान, पटना), डॉ. प्रभात कुमार (वरीय वैज्ञानिक, पान अनुसंधान केंद्र, इस्लामपुर, नालंदा), डॉ. एस.एस. सोलंकी (वरीय वैज्ञानिक, नालंदा महाविद्यालय, नूरसराय), श्री सुधीर कुमार (वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान, कृषि विज्ञान केंद्र, हलसी) की टीम के साथ जिला पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार, अपर समाहर्ता नीरज कुमार, उप विकास आयुक्त सुमित कुमार द्वारा दिनांक 04 जुलाई को चानन प्रखंड के संग्रामपुर पंचायत के ग्राम कछुआ तथा भलुई पंचायत के ग्राम महजनवा एवं सतघरवा में अनुसूचित जनजाति समुदायों के बीच कृषि आधारित आजीविका को सुदृढ़ करने तथा वहाँ के आदिवासी किसान परिवारों की आय में वृद्धि हेतु उच्च मूल्य वाली फसलों तथा औषधीय एवं सुगंधित फसलों की खेती किए जाने के परिप्रेक्ष्य में चिह्नित जनजातिय बाहुल क्षेत्रों का सर्वेक्षण तथा तकनीकी अध्ययन हेतु क्षेत्र का निरीक्षण किया गया।
भ्रमण के दौरान ग्राम कछुआ के स्थानीय ग्रामीण तथा प्रगतिशील कृषक ऋषिदेव बिंद, श्यामदेव बिंद सिकंदर यादव, दिवाकर किस्कु, रामदेव किस्कु, पप्पु कोड़ा,मुरती देवी,रेखा देवी एवं अन्य ग्रामीण उपस्थित थे।

इसी दौरान डीएम द्वारा उक्त कछुआ ग्राम में उत्पादित स्ट्रॉबेरी, सब्जियों, फलों के उत्पादन को जैविक सर्टिफिकेशन करवाने का निदेश दिया गया। जिससे आगे चलकर उस ग्राम को जैविक ग्राम में विकसित किया जा सके। इस हेतु जिला पदाधिकारी, लखीसराय ने मिट्टी जाँच तथा उत्पादित खाद्य पदार्थों के जाँच करवाने का सुझाव दिया गया।
जिला पदाधिकारी, लखीसराय द्वारा बताया गया कि ग्राम कछुआ को एग्रो टूरिज्म हेतु विकसित किया जाय, जिससे बिहार सरकार के बिहार दर्शन योजना को काफी बढ़ावा मिल सकता है, जिससे जीविका को रोजगार प्रदान होगा एवं बछौर प्रजाति के संवर्द्धन हेतु निदेशित किया गया। इसके साथ ही जिला पदाधिकारी, लखीसराय बिहार कृषि रोड मैप के तर्ज पर ग्रामीण रोड मैप तैयार कर कार्य करने का सुझाव दिया गया।सुमित कुमार,डीडीसी द्वारा आँगनबाड़ी केन्द्र, इंदिरा आवास, शौचालय, राशन कार्ड, आशा दीदी इत्यादि की स्थितियों का जायजा लिया गया।
कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा बताया गया कि 10-10 एकड़ के 4 क्लस्टर बनाकर सब्जियों, मसालों, फलों एवं औषधीय पौधों जैसे-तुलसी, कालमेघ, लेमनग्रास की खेती करने तथा कड़कनाथ मुर्गी पालन, मछली पालन मधुमक्खी पालन करने का सुझाव प्रदान किया गया तथा एग्रो टूरिज्म हेतु बढ़ावा देने हेतु रेस्टोरेंट एवं जीविका रसोई बनाकर इन सभी उत्पादों का उसी में उपयोग करने का सुझाव दिया गया, जैसे-कालमेघ चाय, लेमनग्रास चाय इसके साथ ही उन्होंने योग केन्द्र की स्थापना का सुझाव दिया गया।राजीव रंजन, जिला उद्यान पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि इस क्षेत्र में पहले से ही मधुमक्खी पालन, मशरूम की खेती, शेडनेट तथा स्ट्रॉबेरी की खेती की जा रही है। वहां उपस्थित कृषक श्री कृष्ण विंद ने अपना फार्मिंग एरिया जहां वे खेती करते हैं वह भी टीम को दिखाया एवं उनके द्वारा बताया गया की खेती करने से उन्हें अच्छी इनकम हो जाती है।
पूर्व में महजनवा एवं सतघरवा गांव में पानी की व्यवस्था नहीं थी लेकिन आज अवलोकन कर रही टीम ने देखा कि सतघरवा में phed के सहयोग से पानी की व्यवस्था कर दी गई है। तथा महजनवा में phed के द्वारा पानी की व्यवस्था की जा रही है।
इसके साथ ही सतघरवा में मोबाइल टावर के लिए जगह का अवलोकन भी टीम द्वारा कर लिया गया। इसके उपरांत सभी टीम महाजनवा से सतघरवा तक फिर वहां से रोड तक पैदल ही आए क्योंकि गाड़ी के आवागमन हेतु उचित सड़क की व्यवस्था नहीं थी। इसके लिए कार्यपालक अभियंता rwd को सड़क में सुधार हेतु निर्देश दिया गया।
कुंदन कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी-सह-परियोजना निदेशक आत्मा, लखीसराय समन्वित कृषि को अपने एवं आत्मा योजना के तहत् प्रशिक्षण दिलाने की बात कही गयी।
