जीरो टॉलरेंस नीति पर तमाचा: तीस शेयर ट्रांसफर के लिए साढ़े सात लाख मांगते एआर गुरुग्राम के इंस्पेक्टर कैमरे में कैद

गुस्ताख़ी माफ़, हरियाणा – पवन कुमार बंसल

जीरो टॉलरेंस नीति पर तमाचा। तीस शेयर ट्रांसफर के लिए साढ़े सात लाख मांगते एआर गुरुग्राम के इंस्पेक्टर कैमरे में कैद। खानापूर्ति के लिए सस्पेंड और अब बहाल होकर वही लोग शिकायत करने वाले को धमका रहे हैं..

हरियाणा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रघुबीर सिंह कादियान ने सदन में गुरुग्राम स्थित सहायक रजिस्ट्रार (एआर), सहकारी समितियों के कार्यालय में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। आरोप था कि एक सहकारी ग्रुप हाउसिंग सोसायटी के 30 सदस्यों के शेयर ट्रांसफर के लिए प्रत्येक से ₹25,000 की मांग की जा रही थी।
मंत्री अरविंद शर्मा ने जवाब देते हुए कहा कि मामले में त्वरित कार्रवाई की गई और तीन निरीक्षकों को निलंबित कर दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण ने भी सरकार की इस तत्परता की सराहना की।
लेकिन हमारी पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। खबर प्रसारित होने के मात्र आधे घंटे के भीतर—जिसमें एक निरीक्षक को कैमरे पर 30 सदस्यों के शेयर ट्रांसफर के लिए ₹7.5 लाख की कथित मांग करते हुए दिखाया गया था—उसे निलंबित कर दिया गया। इसके बाद एक अन्य उप-निरीक्षक को भी निलंबित किया गया। गुरुग्राम के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में मामला दर्ज किया गया, वीडियो साक्ष्य जमा किए गए और आवाज़ के नमूने भी लिए गए।
सबसे चिंताजनक बात इसके बाद सामने आई। सरकार की ‘भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता’ की नीति के बावजूद, आरोपित अधिकारियों को न केवल बहाल कर दिया गया, बल्कि उन्हें उसी कार्यालय में दोबारा तैनात भी कर दिया गया।
अब ये शिकायतकर्ता को गैर-सोसाइटी नियम के तहत, गैर-सोसाइटी सदस्य के लिए गलत काम करने को मजबूर करके फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। सोसाइटी में नए फ्लैट खरीदारों को गलत नियम बताकर गुमराह किया जा रहा है।
इनको एक बीजेपी विधायक का परिचित पूरा संरक्षण दे रहा है, जो एआर गुरुग्राम कार्यालय में ही कार्यरत है।
गुरुग्राम एसीबी की जांच में अब तक कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं देती, जो इस पूरे प्रकरण पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
ये सिस्टम को नहीं मानते और जनता को अंगूठा दिखाते हैं।

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