सिरसा में शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 118वीं जयंती पर लगाई गई कोटेशन प्रदर्शनी

सिरसा, ( ऐलनाबाद )29 सितंबर ( डॉ एम पी भार्गव ): आजादी आंदोलन की समझौताहीन संघर्ष की धारा के महान क्रांतिकारी योद्धा शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 118वीं जयन्ती पर शहीद यादगार समिति सिरसा ने उनके लिखे हुए विचारों, कथनों की एक कोटेशन प्रदर्शनी रविवार को सिरसा की बी-ब्लॉक सोसायटी के पार्क में सुबह 6 बजे से लगाई गई। प्रदर्शनी को बहुत से वरिष्ठ नागरिकों, युवाओं, महिलाओं ने देखा, उनके विचारों-कथनों को पढ़ा और अपना समर्थन दिया।

शहीद यादगार समिति ने बताया कि शहर के भगत सिंह चौक पर लगी उनकी मूर्ति को चारों ओर से बड़े बड़े होर्डिंग लगा कर बहुत दिनों से ढंका हुआ है। इसी तरह भगतसिंह पार्क को ताला लगा हुआ है। समिति ने जिला प्रशासन व नगर प्रशासन से मांग की है कि होर्डिंगों को हटवाया जाए और इन्हें पुनः न लगने दिया जाए। पार्क से ताला हटवा कर पार्क की उचित व्यवस्था की जाए ताकि कल सवेरे वहां जाकर अपनी श्रद्धांजलि पेश कर सकें।

सर्वविदित है कि भगत सिंह व उनके क्रांतिकारी साथी देश की जनता के लिए जिए और जनता के लिए ही कुर्बान हुए। “हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (एच.एस.आर.ए)” के नाम से एक सही क्रांतिकारी पार्टी बना कर उन्होंने आजादी आन्दोलन को जी-जान से आगे बढ़ाया था। उनका उद्देश्य सिर्फ अंग्रेजों को भगाना ही नहीं था बल्कि ब्रिटिश साम्राज्यशाही को समाप्त कर मजदूर, किसानों, मेहनतकशों के हित में एक नई समाजवादी व्यवस्था कायम करना था जिसमें मानव द्वारा मानव का शोषण-दमन नहीं कर सके। परन्तु उनका यह सपना आज भी अधूरा है। कारण रहा कि आजादी आंदोलन की बागडोर आखिर तक समझौता-परस्त नेतृत्व के हाथों में चली गई और सत्ता पर पूंजीपति वर्ग काबिज हो गया। अनुभव बताता है कि जनता की तमाम समस्याओं का मूल कारण देश में कायम शोषणकारी पूंजीवादी व्यवस्था है।

आजादी के बाद सत्ताधारी पार्टियों ने पूंजीपतियों की हित-पोषक, जन-विरोधी नीतियां जनता पर हैं। परिणामस्वरूप समस्त धन सम्पत्ति चन्द पूंजीपतियों के हाथों में जमा हो गई है। जबकि मेहनती जनता महंगाई, बेरोजगारी से त्रस्त है। चारों तरफ सामाजिक उदासीनता व घोर निराशा हताशा है। जनजीवन की असल समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए नीति, नैतिकता, चरित्र व संस्कृति पर भीषण हमले कर मानवीय गुणों व मूल्यबोधों को रौंदा जा रहा है। नव-जागरण की महान हस्तियों व क्रांतिकारी देशभक्तों के जीवन संघर्षों को खत्म किया जा रहा है। तार्किक वैज्ञानिक सोच की जगह धर्मांधता, कट्टरता, जात-पात व साम्प्रदायिकता को बढ़ावा दिया जा रहा है। शहीद भगत सिंह का कहना था कि सांप्रदायिकता को रोकने के लिए जनता के बीच वर्ग-चेतना पनपाने की जरूरत है ताकि लोग खुद असली दुश्मन को पहचान सकें।

शहीद भगत सिंह के 118वें जन्म दिवस – 28 सितंबर 2025 को सिरसा के टाउन पार्क, (नजदीक लाल बत्ती) में सुबह से सायं तक उनके क्रांतिकारी विचारों-कथनों की एक कोटेशन प्रदर्शनी लगाई जाएगी। शहरवासियों से अपील है कि इसमें शामिल हों, भगतसिंह के विचारों को जानें, शहीदों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि दें, कार्यक्रम को सफल बनाने में हर तरह का समर्थन व सहयोग प्रदान करें।

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