बांग्लादेश की सियासत में बड़ा मोड़: 17 साल बाद लौटे तारिक रहमान, पीएम पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे
भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में अगले साल 12 फरवरी को आम चुनाव होने हैं। ऐसे समय में देश की राजनीति उथल-पुथल, हिंसा और असंतोष के दौर से गुजर रही है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में राजनयिक शरणार्थी के रूप में रह रही हैं, जबकि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया गंभीर बीमारी के चलते वेंटिलेटर पर हैं। वहीं, कार्यवाहक सरकार के प्रमुख माने जा रहे मोहम्मद यूनुस की पकड़ कमजोर होती दिख रही है। ऐसे हालात में खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान को बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
बांग्लादेश इस समय राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा की आग में झुलस रहा है। खास तौर पर अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है। इसी बीच 17 साल के लंबे निर्वासन के बाद तारिक रहमान की देश वापसी ने सियासी समीकरण बदल दिए हैं। शुक्रवार, 25 दिसंबर को क्रिसमस के दिन तारिक रहमान ढाका पहुंचे। वह कुल 6314 दिनों के बाद अपने वतन लौटे हैं।
तारिक रहमान, बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। वर्ष 2008 में तत्कालीन शेख हसीना सरकार के दौरान उनके और उनकी मां के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई मामले दर्ज हुए थे। गिरफ्तारी की आशंका के चलते तारिक रहमान उसी वर्ष लंदन चले गए थे और तब से वहीं रह रहे थे। उन पर कुल 84 भ्रष्टाचार के मामले दर्ज थे, जिनमें 2007 में सजा भी हो चुकी थी। हालांकि, 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद तारिक रहमान कई मामलों से बरी हो गए।
देश लौटते ही तारिक रहमान ने भावनात्मक अंदाज में प्रतिक्रिया दी। एयरपोर्ट से बाहर निकलकर उन्होंने जूते उतारे, नंगे पांव जमीन पर खड़े हुए और मुट्ठीभर मिट्टी को छूकर अपने वतन के प्रति सम्मान जताया। उनके स्वागत में ढाका में BNP की ओर से एक विशाल रैली आयोजित की गई, जिसमें एक लाख से अधिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
रैली को संबोधित करते हुए तारिक रहमान ने कहा, “हम देश में शांति कायम करेंगे और एक नया बांग्लादेश बनाएंगे।” उन्होंने अपने भाषण में शेख हसीना का नाम लिए बिना राष्ट्रीय एकता और शांति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चाहे पुरुष हों, महिलाएं हों या बच्चे, बांग्लादेश की शांति और गरिमा को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास देश को बेहतर बनाने की एक ठोस योजना है, जिस पर सभी को मिलकर काम करना होगा। इस दौरान उन्होंने अहिंसक आंदोलन के प्रतीक मार्टिन लूथर किंग जूनियर का भी उल्लेख किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तारिक रहमान की वापसी से सबसे अधिक फायदा BNP को होगा। पार्टी की राजनीतिक पकड़ मजबूत होगी और आगामी चुनाव में वह इसे अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश करेगी। वहीं, कार्यवाहक सरकार के लिए भी तारिक रहमान एक अहम कड़ी साबित हो सकते हैं, जो आंदोलन और असंतोष को शांत करने में भूमिका निभा सकते हैं।
अब सवाल यह है कि तारिक रहमान की वापसी बांग्लादेश में शांति की दिशा में कदम साबित होगी या फिर मौजूदा राजनीतिक तनाव और हिंसा को और हवा देगी। 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव इस सवाल का जवाब देने में अहम साबित होंगे।
