Electricity Employees’ Strike: हरियाणा में बिजली संकट पर सरकार अलर्ट, 6,230 पुलिसकर्मी तैनात; CM नायब सैनी ने हड़ताल टालने की अपील की
Electricity Employees’ Strike: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की 22, 23 और 24 अक्टूबर को प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल को लेकर सरकार एक्शन मोड में है। गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली आपूर्ति का लाइसेंस दिए जाने के विरोध में कर्मचारियों की हड़ताल की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को प्रशासनिक सचिवों और उपायुक्तों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। सरकार ने हड़ताल के दौरान बिजली आपूर्ति सुचारू रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। सुरक्षा के लिए 6,230 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, जबकि संवेदनशील बिजली उपक्रमों की निगरानी ड्रोन से की जाएगी।
Electricity Employees’ Strike: बिजली कर्मचारियों के साथ खड़ी है सरकार
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बैठक में कहा कि गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली आपूर्ति का लाइसेंस देने के मामले में हरियाणा सरकार बिजली कर्मचारियों के साथ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) के फैसले के खिलाफ विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) में अपील करेगी और मामले में मजबूती से पैरवी करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि बिजली कर्मचारी यूनियन चाहें तो उनकी पसंद के वकील के माध्यम से भी मामले की पैरवी कराई जा सकती है। उन्होंने कहा कि बातचीत के दरवाजे खुले हैं और यूनियनों को जनहित में हड़ताल का फैसला वापस लेने या स्थगित करने पर विचार करना चाहिए।
Electricity Employees’ Strike: निजी कंपनी को लाइसेंस देने के खिलाफ सरकार
बैठक में ऊर्जा मंत्री अनिल विज भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि सरकार ने निजी कंपनी को बिजली आपूर्ति का लाइसेंस देने के लिए कोई आवेदन नहीं मांगा था और सरकार शुरू से ही इस मामले में निजी कंपनी को लाइसेंस दिए जाने का विरोध करती रही है।
सरकार का कहना है कि बिजली कर्मचारियों की मांग के अनुरूप कानूनी विकल्प अपनाए जा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री ने यूनियनों से अपील की कि वे सरकार के कदम को देखते हुए हड़ताल टालने पर विचार करें।
Electricity Employees’ Strike: 6,230 पुलिसकर्मी संभालेंगे सुरक्षा व्यवस्था
हड़ताल के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रदेशभर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी बिजलीघर, पावर ग्रिड या अन्य महत्वपूर्ण बिजली संस्थान को नुकसान न पहुंचे। हड़ताल की आड़ में उपद्रव करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सभी जिलों में जिला स्तरीय कमेटियां गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। ये कमेटियां चंडीगढ़ में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में गठित हाईलेवल कमेटी को नियमित रूप से रिपोर्ट देंगी। संवेदनशील उपक्रमों की ड्रोन से निगरानी भी की जाएगी।
बैठक में पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि हड़ताल के दौरान अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस के अनुसार, 1501 नंबर पर मिलने वाली शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। सभी जिलों में कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन की व्यवस्था भी की गई है।
Electricity Employees’ Strike: वैकल्पिक कर्मचारियों से सुचारू रखी जाएगी बिजली आपूर्ति
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि त्योहारी सीजन को देखते हुए बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए जरूरत पड़ने पर विभिन्न विभागों के तकनीकी कर्मचारियों, उद्योगों में कार्यरत तकनीकी स्टाफ और पॉलिटेक्निक कॉलेजों व ITI के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की सेवाएं ली जा सकती हैं।
ऊर्जा विभाग की आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड़ ने बताया कि आम लोगों को परेशानी से बचाने के लिए सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पड़ोसी राज्यों के बिजली कर्मचारियों की सेवाएं लेने की व्यवस्था भी की जाएगी। कंट्रोल रूम में निदेशक स्तर के अधिकारी तैनात रहेंगे और हड़ताल की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। बिजली के साथ-साथ पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
Electricity Employees’ Strike: अब बिजली कर्मचारी यूनियनों के फैसले पर नजर
सरकार की ओर से APTEL में अपील करने, कर्मचारियों की पसंद के वकील से पैरवी कराने और बातचीत के रास्ते खुले रखने का भरोसा दिया गया है। इसके बावजूद 22 से 24 अक्टूबर तक प्रस्तावित हड़ताल को लेकर बिजली कर्मचारी यूनियनों का अंतिम फैसला महत्वपूर्ण रहेगा। अब देखना होगा कि सरकार की अपील के बाद यूनियनें हड़ताल स्थगित करती हैं या अपने आंदोलन पर कायम रहती हैं।

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