UP Budget 2026-27: मुख्यमंत्री ने बजट खर्च में तेजी लाने के दिए निर्देश, अगले दो माह में 60% व्यय का लक्ष्य
लखनऊ, 28 सितंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वित्तीय वर्ष 2026-27 ( UP Budget 2026-27 ) के बजट प्राविधानों के अनुरूप वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने और सरकारी विभागों में बजट खर्च की गति तेज करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय वर्ष की पहली छमाही समाप्त होने वाली है, ऐसे में जिन विभागों में बजट खर्च की गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है, वहां तत्काल सुधार किया जाए। उन्होंने अगले दो माह में हर हाल में 70 प्रतिशत वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने और कुल आवंटित बजट के सापेक्ष कम से कम 60 प्रतिशत व्यय सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया।
मुख्यमंत्री रविवार शाम वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की मौजूदगी में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट प्राविधानों, वित्तीय स्वीकृतियों और वास्तविक व्यय की समीक्षा कर रहे थे। बैठक के दौरान प्रदेश के सर्वाधिक बजट वाले 30 प्रमुख विभागों के कार्यों और उनकी वित्तीय प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की गई।
बजट का समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बजट का उद्देश्य केवल धनराशि का प्राविधान करना या आवंटन करना नहीं है, बल्कि उसका समयबद्ध और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करते हुए उसका लाभ जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने वित्त मंत्री को निर्देश दिया कि विभागीय मंत्रियों के साथ बजट खर्च की नियमित और बिंदुवार समीक्षा की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन विभागों में नीतिगत, प्रक्रियात्मक अथवा तकनीकी कारणों से वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने या बजट खर्च करने में किसी तरह की अड़चन आ रही है, उसका तत्काल समाधान कराया जाए। वित्त विभाग को भी बजट खर्च की नियमित निगरानी करने और प्रगति की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित की योजनाओं और विकास परियोजनाओं में गुणवत्ता तथा समयबद्धता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। यदि किसी कार्य में अनावश्यक देरी अथवा गुणवत्ता में कमी सामने आती है तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
पात्र किसानों को केसीसी से जोड़ने पर जोर
बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बैंकों के क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात में सुधार पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र किसान को किसान क्रेडिट कार्ड यानी केसीसी की सुविधा मिलनी चाहिए।
इसके लिए गांववार और किसानवार मैपिंग कराने के निर्देश दिए गए, ताकि पात्र किसानों की पहचान कर उन्हें बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ा जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ बैंकिंग व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में भी ठोस प्रयास किए जाएं।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग और ऋण सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए ‘रूरल क्रेडिट कॉन्क्लेव’ जैसे आयोजनों की रूपरेखा तैयार करने पर भी जोर दिया। इसका उद्देश्य पात्र किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े लोगों को वित्तीय सुविधाओं से बेहतर तरीके से जोड़ना है।
जीआई उत्पादों की ब्रांडिंग और प्रचार पर जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के स्थानीय उत्पादों और शिल्प को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने एमएसएमई विभाग को उत्तर प्रदेश के जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की ब्रांडिंग और व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के स्थानीय उत्पादों की पहचान को देश और दुनिया के बाजार तक पहुंचाने के लिए प्रभावी रणनीति के साथ काम किया जाना चाहिए। जीआई उत्पादों की बेहतर ब्रांडिंग और प्रचार से स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी गति देने की दिशा में काम किया जा सकता है।
केंद्र से मिलने वाली धनराशि के लिए समन्वय के निर्देश
केंद्र सहायतित योजनाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने उन योजनाओं पर भी विशेष ध्यान दिया, जिनमें भारत सरकार से धनराशि प्राप्त होनी है। उन्होंने विभागीय स्तर पर प्रभावी समन्वय करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभागीय मंत्री संबंधित केंद्रीय मंत्रियों से सीधे संवाद कर लंबित धनराशि और स्वीकृतियों से जुड़े विषयों का समाधान कराएं। इसका उद्देश्य केंद्र से मिलने वाली सहायता में अनावश्यक देरी को रोकना और केंद्रीय सहायता से संचालित योजनाओं की गति बनाए रखना है।
₹9.99 लाख करोड़ से अधिक का है प्रदेश का बजट
बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट की वित्तीय स्थिति की भी जानकारी दी गई। समीक्षा में बताया गया कि उत्तर प्रदेश का कुल बजट ₹9,99,056.48 करोड़ है। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में ₹1,58,474.15 करोड़ अधिक है। बजट में विकास योजनाओं के लिए ₹5,01,957.09 करोड़ का प्राविधान किया गया है।
अब तक शासन स्तर से ₹5,15,918.44 करोड़ की वित्तीय स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं। यह कुल बजट का 51.6 प्रतिशत है। इनमें योजनाओं से संबंधित ₹2.13 लाख करोड़ से अधिक की स्वीकृतियां शामिल हैं। इसके सापेक्ष प्रदेश में अब तक ₹2,83,870.11 करोड़ का वास्तविक व्यय दर्ज किया गया है।
मुख्यमंत्री ने विभागों को निर्देश दिए कि वित्तीय वर्ष की शेष अवधि में बजट प्राविधानों और वास्तविक जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाए। उन्होंने कहा कि बजट का आकलन वास्तविक आवश्यकता और व्यावहारिक उपयोगिता के आधार पर किया जाना चाहिए, जिससे धनराशि अनावश्यक रूप से प्राविधानित न रहे और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।
प्रमुख विभागों की बजट प्रगति की समीक्षा
- विभागवार समीक्षा में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग का बजट व्यय के मामले में प्रदर्शन बेहतर रहा। विभाग द्वारा बजट के सापेक्ष 54 प्रतिशत व्यय किया जा चुका है।
- ऊर्जा विभाग के लिए ₹73,348.56 करोड़ का बजट निर्धारित है। इसके सापेक्ष ₹41,541.93 करोड़ की वित्तीय स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं, जो 50 प्रतिशत से अधिक है।
- बेसिक शिक्षा विभाग में ₹82,245.68 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹65,982.04 करोड़ की वित्तीय स्वीकृतियां जारी की गई हैं। यह बजट का 80.2 प्रतिशत है। विभाग द्वारा अब तक ₹31,718.92 करोड़ का व्यय किया जा चुका है।
- गृह विभाग के लिए ₹43,891.37 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। इसके सापेक्ष ₹40,502.28 करोड़ यानी 92.2 प्रतिशत की वित्तीय स्वीकृतियां जारी हो चुकी हैं। विभाग द्वारा ₹14,712.68 करोड़ का व्यय दर्ज किया गया है।
- लोक निर्माण विभाग में ₹45,270.69 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹27,375.91 करोड़ की वित्तीय स्वीकृतियां जारी की गई हैं, जो 60.5 प्रतिशत है। विभाग द्वारा अब तक ₹14,178.60 करोड़ खर्च किए गए हैं।
- वहीं, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में ₹39,906.52 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹25,557.48 करोड़ की वित्तीय स्वीकृतियां जारी हुई हैं। यह 64 प्रतिशत है। विभाग द्वारा अब तक ₹10,286.50 करोड़ का वास्तविक व्यय किया गया है।
फील्ड में जाकर विकास कार्यों की समीक्षा करें अधिकारी
मुख्यमंत्री ने सभी विभागाध्यक्षों और वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से फील्ड में जाकर विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा करें। जिन स्थानों पर विकास कार्यों की गति धीमी है, वहां तत्काल आवश्यक सुधार कराया जाए।
उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष की शेष अवधि में सभी विभाग अपने निर्धारित लक्ष्यों को समय से पूरा करें। विकास और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। हालांकि उपलब्ध बजट का प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बजट खर्च की गति बढ़ाने के साथ-साथ योजनाओं की गुणवत्ता और उनके वास्तविक लाभार्थियों तक लाभ पहुंचने पर भी ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वित्तीय संसाधनों का उपयोग जनहित और विकास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से किया जाना चाहिए।
